भाजपा को हराने वाले नामित पार्षद पदों की लाइन में आगे, मंडी समिति अध्यक्ष पद पाने की भी कर रहे हैं कोशिश

रुड़की । हरिद्वार हो या रुड़की। दोनों जगह की भाजपा की एक जैसी कहानी है। जिन्होंने नगर निगम के चुनाव में भाजपा को हराने का काम किया । अब वह बड़ी ही चालाकी से मंडी समिति अध्यक्ष ,उपाध्यक्ष या फिर पार्षद पदों के लिए लाइन में सबसे आगे लगे हैं। चिंताजनक बात यह है कि ऐसे लोगों को प्रदेश स्तरीय नेताओं का समर्थन भी मिल रहा है। स्थिति मात्र हरिद्वार, रुड़की की नहीं बल्कि झबरेड़ा, भगवानपुर ,शिवालिक नगर, लक्सर, लंढौरा, मंगलौर में भी वही कार्यकर्ता पार्षद पद हासिल करने की कोशिश में लगे हैं। जिन्होंने कि निकाय चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के लिए हराने का काम किया। इसमें कोई संदेह नहीं यदि भाजपा भगवानपुर, झबरेड़ा ,लक्सर और शिवालिक नगर में जीती थी तो उसमें प्रत्याशियों का अपना दम था। अन्यथा इन चारों निकायों में भाजपा के कार्यकतार्ओं ने ही पार्टी के प्रत्याशियों को हराने में में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यह बात चुनाव समीक्षा करने के दौरान सामने भी आ गई थी। भीतरघाती चिन्हित भी हो गए थे। लेकिन उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई।नतीजतन अब वह उनमें से कोई तो मंडी समिति का अध्यक्ष बनने की कोशिश कर रहा है । कोई उपाध्यक्ष व कोई सदस्य। बहुत सारे तो पार शासन स्तर से नामित होने वाले पार्षद बनने की कोशिश में है। रुड़की नगर निगम के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ खुलकर व भितरघात करने वाले दो नेता भगवानपुर मंडी के अध्यक्ष बनना चाहते हैं। दोनों की बड़ी दावेदारी है। इनमें तो एक तो खुलकर ही निर्दलीय के साथ था तो दूसरा भाजपा प्रत्याशी के साथ रहकर भितरघात करता रहा। यह भी निर्दलीय से अपनी पुरानी दोस्ती निभा रहा था। रुड़की में नामित पार्षद की लाइन में 15 ऐसे कार्य करता है जिन्होंने कि भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काम किया। हीरो नेता ऐसा है जो कि अब अपने पुत्र को पार्षद नामित कराना चाहता है। लेकिन जब चुनाव थे तो उसे भाजपा प्रत्याशी में खोट नजर आ रहा था। यहां पर मंडी अध्यक्ष पद की लाइन में भी चार नेता ऐसे हैं जिनके परिवार वालों ने भी भाजपा को वोट नहीं दिया। इनमें से दो रामनगर क्षेत्र निवासी हैं तो दो रुड़की मध्य क्षेत्र निवासी है। यहां पर भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काम करने वाले दो तीन नेता तो फिलहाल जिला अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने की सोच रहे हैं। हालांकि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता इनकी खुलकर आलोचना कर रहे हैं। कह रहे हैं कि ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए जो कि चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ काम करते हो और अब जिलाध्यक्ष बनना चाह रहे हैं। लेकिन पार्टी सूत्रों ने बताया कि भले ही संगठन स्तर से ऐसे नेता कार्यकर्ता अपना नाम विभिन्न पदों के लिए हाईकमान तक पहुंचा दें लेकिन मुख्यमंत्री स्तर से जो जानकारी जुटाई गई है उसमें ऐसे लोगों को शायद ही पद नसीब होंगे। मंडी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद नामित होने का उनका ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा। बहरहाल, भारतीय जनता पार्टी में फिलहाल मंडी अध्यक्ष उपाध्यक्ष पार्षद पदों के लिए हलचल है। सभी अपने अपने ढंग से प्रयास में लगे हुए हैं। इस बीच कुछ भीतर घाटियों को समझ भी आने लगी है कि उनके द्वारा पार्टी को चुनाव के दौरान जो नुकसान पहुंचाया गया है वह उनसे वाकई ही बड़ी गलती हो गई है। क्योंकि उन्हें इस बात का आभास हो गया है कि उनकी गतिविधियों से पार्टी हाईकमान अवगत हो गया है इसलिए अब उन्हें सत्ता का कोई पद मिलने वाला नहीं है। हालांकि वह पार्टी के नेताओं के सामने सफाई दे रहे हैं कि उनके द्वारा चुनाव में दिन रात काम किया गया। वहीं पार्टी नेताओं की ओर से इन पर सवाल भी दागे जा रहे हैं और पूछा जा रहा है कि दिन-रात काम किसके लिए किया गया।

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