राजेंद्र और शहजाद का मुगालता हुआ दूर, जिला पंचायत की सियासत में हाशिए पर पहुंचे दोनों

रुड़की । जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में चौधरी राजेंद्र सिंह और मोहम्मद शहजाद का यह मुगालता पूरी तरह दूर हो गया है कि उनके बिना कोई अध्यक्ष नहीं बन सकता। लेकिन इन दोनों नेताओं के विरोध के बावजूद बड़े बहुमत के साथ सुभाष वर्मा अध्यक्ष बन गए। सुभाष वर्मा अध्यक्ष ही नहीं बने हैं बल्कि वह इन दोनों नेताओं के सहयोग के बिना बोर्ड का संचालन भी सुचारु रुप से करेंगे। ऐसे संकेत जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होने के साथ ही कई उन जिला पंचायत सदस्यों ने भी दिए हैं जो कि किन्ही कारणों के चलते वर्मा खेमे के साथ नहीं थे। इन जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 4 है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह जिला पंचायत बोर्ड के संचालन मैं नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा का हर स्तर पर सहयोग करेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिला पंचायत बोर्ड में अध्यक्ष सुभाष वर्मा का सहयोग करने वाले सदस्यों की संख्या अगले दिनों में और अधिक बढ़ जाएगी। दरअसल, अभी तक काफी जिला पंचायत सदस्य ही मानते रहे हैं कि जिला पंचायत की सियासत में यदि बने रहना है तो चौधरी राजेंद्र सिंह या फिर हाजी मोहम्मद शहजाद खेमे में रहना होगा। क्योंकि पिछले दो दशक से इन दोनों खेमों का ही जिला पंचायत की सियासत पर कब्जा बना रहा। इस बीच में यदि कोई तीसरा खेमा उभरा भी तो उसे इन दोनों नेताओं के गुप्त गठजोड़ ने छिन्न-भिन्न कर दिया। जिसके चलते जिला पंचायत की सियासत दोनों खेमों के बीच ही बटी रही। जिला पंचायत से जुड़ा हर मसला इन दोनों नेताओं के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। लेकिन इस बार इन दोनों नेताओं की कलई खुल गई। जिला पंचायत की सियासत में अब तक दोनों नेता एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते थे । लेकिन जिस तरह से इस चुनाव में यह एक साथ आए तो तीसरा मजबूत खेमा उभरकर सामने आ गया। तीसरे खेमे ने इन दोनों नेताओं का मुगालता पूरी तरह दूर कर दिया। स्पष्ट कर दिया है कि जिला पंचायत की सियासत में अब वह पूर्व की तरह जो चाहेंगे वैसा होने वाला नहीं है। न तो उनकी मर्जी से जिला पंचायत का प्रशासन चलेगा और न ही उनके द्वारा मनमाने ढंग से किसी क्षेत्र में अधिक बजट आवंटित करा दिया जाएगा। जिला पंचायत में अब वह होगा जो कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुभाष वर्मा व जिला पंचायत सदस्य चाहेंगे। क्योंकि शासन भी हरिद्वार जिला पंचायत को लेकर अपना रुख एक तरह से साफ कर चुका है। कि जिला पंचायत हरिद्वार विकास के लिए है न कि किसी नेताओं की राजनीति बनाए रखने का जरिया। शासन के इस रुख से जिला पंचायत का प्रशासन भी अवगत हो गया है। जो अधिकारी कर्मचारी अभी तक नेताओं को ही अपना बॉस मानते थे। शायद वह भी अब सुधर जाएंगे। कल से उनकी कार्यशैली में काफी परिवर्तन देखने को मिल भी रहा है। जिस तरह से जिला पंचायत की संपत्ति को खुर्द बुध किया जा रहा था। डाक बंगले पर भी अपना एकाधिकार माना जा रहा था। ऐसा भी अब चलने वाला नहीं है। क्योंकि नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा आज युवा टीम के साथ रुड़की जिला पंचायत डाक बंगले पर पहुंचे जहां पर उन्होंने वहां की बदहाली पर चिंता जाहिर की। उनके द्वारा अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देशित भी किया गया कि रुड़की डाक बंगले को डाक बंगले का स्वरूप दिया जाए। बहरहाल जिला पंचायत की सियासत में पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद और पूर्व जिला पंचायत हरिद्वार चौधरी राजेंद्र सिंह हाशिए पर पहुंच गए हैं। हेलो कि शहजाद की भाभी और उनके भाई जिला पंचायत सदस्य है। फिलहाल चौधरी राजेंद्र सिंह परिवार का कोई जिला पंचायत सदस्य नहीं है। माना जा रहा है कि जिला पंचायत बोर्ड में अपना परिवार का कोई सदस्य जरूर रहे। इसके लिए चौधरी राजेंद्र सिंह के द्वारा कोटवाल आलमपुर जिला पंचायत सदस्य सीट पर हो रहे उपचुनाव में पूरे जोर भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि चौधरी महेंद्र सिंह को इस सीट पर कामयाबी मिल भी जाए तो भी अबे जिला पंचायत बोर्ड में उनका पहले जैसा दखल रहने वाला नहीं है। क्योंकि वह सत्ताविहीन हो चुके हैं। सूत्रों की मानें तो शहजाद और राजेंद्र समर्थित कर्मचारियों के जल्द तबादले होने जा रहे हैं। इनके समर्थकों द्वारा जिला पंचायत की ओर से प्राप्त की जा रही सुविधाएं भी बंद होने जा रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिस तरह से जिला पंचायत की सियासत में तीसरा खेमा उभरा है। ऐसे में मोहम्मद शहजाद और राजेंद्र चौधरी की जिला पंचायत की सत्ता में इतनी जल्द वापसी होने वाली नहीं है। क्योंकि वर्ष 2020 के अंतिम में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान सभी जिला पंचायत सदस्य सीटों का दोबारा परिसीमन होने वाला है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के सियासी समीकरण और भी अधिक बिगड़ने की आशंका है। वैसे भी अब इन दोनों नेताओं के बारे में स्थिति साफ हो चुकी है कि है एक दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि जिला पंचायत की सियासत में गुप्त समझौते के तहत सियासत कर रहे थे। इसीलिए अब युवा नेता खुद अपनी सियासत को आगे बढ़ाएंगे ना कि इन नेताओं के मोहरे बनेंगे। ऐसा कल चुनाव परिणाम आने के बाद युवा नेताओं के द्वारा कह भी दिया गया। अब उनका जमाना है।

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