भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के उत्थान में संत महापुरुषों की अहम भूमिका: मदन कौशिक, ब्रह्मलीन डॉक्टर स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज के शताब्दी जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए शहरी विकास मंत्री

हरिद्वार । भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के उत्थान में संत महापुरुषों की अहम भूमिका है और जिस जगह पर संत समागम का आयोजन हो जाता है वह सदैव के लिए पूजनीय स्थल बन जाता है यह बात शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मध्य हरिद्वार स्थित नवनिर्मित डॉक्टर स्वामी श्याम सुंदर भवन के लोकार्पण समारोह एवं ब्रह्मलीन डॉक्टर स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज के शताब्दी जन्मोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते करते हुए व्यक्त किए । शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि समाज के प्रेरणास्रोत संत महापुरुषों का जीवन मानव सेवा के लिए सदैव समर्पित रहता है और ब्रह्मलीन डॉक्टर श्याम सुंदर दास शास्त्री महाराज एक युगपुरुष थे जिन्होंने गंगा तट से अनेकों सेवा प्रकल्प प्रारंभ कर सदैव गरीब असहाय लोगों की सेवा की। उन्होंने संपूर्ण मानवता को समाजसेवा का संदेश देकर एक नई दिशा प्रदान की ऐसे महापुरुषों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मदन कौशिक ने कहा कि जल्द ही गरीब दासी संस्था अथवा ब्रह्मलीन डॉक्टर श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज के नाम से एक गंगा घाट का निर्माण किया जाएगा। रेलेव स्टेशन मार्ग का नाम भी डॉक्टर श्यामसुंदर दास शास्त्री मार्ग किया जाएगा। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि ब्रह्मलीन डॉक्टर श्याम सुंदर दास शास्त्री महाराज का सौम्या एवं सरल जीवन सभी के लिए प्रेरणादायक है जिन्होंने जीवन पर्यंत समाज को एकता के सूत्र में बांधकर समरसता का संदेश दिया। उन्हीं के आदर्शों पर चलकर उनके सुयोग्य शिष्य स्वामी हरिहरानंद एवं स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं और संतों की सेवा कर भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर समाज को धर्म के प्रति लाभान्वित कर रहे हैं। युग प्रवर्तक के रूप में ब्रह्मलीन डॉक्टर श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज सभी की स्मृतियों में सदैव जीवित रहेंगे। निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से सभी को प्रेरणा लेकर समाज सेवा में अपना योगदान प्रदान करना चाहिए। ब्रह्मलीन डॉक्टर श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज एक महान संत थे जिन्होंने सदा भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाकर धर्म के संरक्षण संवर्धन का संदेश दिया। मुखिया महंत दुर्गादास एवं महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि संतों के सानिध्य में व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है और ब्रह्मलीन स्वामी डॉक्टर श्यामसुंदर दास शास्त्री महाराज एक आदर्श महापुरुष थे जिन्होंने सदैव भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का संदेश अनेकों धर्म सभाओं के माध्यम से समाज में प्रचारित किया उनका जीवन निर्मल जल के समान था जिससे सभी को प्रेरणा लेकर भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। स्वामी हरिहरानंद एवं स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज ने कहा कि पूज्य गुरुदेव के अधूरे कार्यों को पूर्ण करना हैं उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है और गुरुदेव द्वारा गंगा तट से प्रारंभ किए गए सेवा प्रकल्प में निरंतर बढ़ोतरी कर संतों की सेवा करना ही उनके गुरुदेव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का समाजसेवी संजय वर्मा ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन पदमप्रकाश सुवेदी ने किया। इस दौरान म.मं. स्वामी भगवत स्वरूप, म.मं. स्वामी परमात्मदेव, म.मं. स्वामी अर्जुनपुरी, बाबा हठयोगी, महंत कमल दास, महंत निर्मल दास, स्वामी दिनेश दास, महंत शिवानंद, महंत श्रवण मुनि, महंत सुतीक्ष्ण मुनि, महंत विष्णुदास, महंत प्रह्लाद दास, डॉ. पदमप्रसाद द्विवेदी, डॉक्टर लोकनाथ सुवैदी, स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी ज्ञानानंद, महंत प्रेमदास, समाजसेवी अजय कुमार, समाजसेवी जगदीशलाल पाहवा, संत जगजीत सिंह, संत मनजीत सिंह, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, भाजपा पार्षद दल के उपनेता अनिरूद्ध भाटी, लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास सहित बड़ी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित रहे।

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