अफसरों को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की दो टूक, आप किताब पढ़े, मैं जनता का चेहरा पढ़ूंगा, प्राधिकरण में जेई और एई माल कमाते हैं, इसीलिए प्राधिकरण की जरूरत नहीं

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र तीरथ सिंह रावत ने अफसरों को दो टूक शब्दों में कहा कि वे किताब पढ़े, मैं जनता का चेहरा पढ़ूंगा। मुझे सिर्फ हर काम का रिजल्ट चाहिए।सोमवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित स्वागत समारोह में सीएम तीरथ ने यह बात कही। एक तरह से उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि नौकरशाहों ने यदि किसी काम में अड़ंगा डालने की कोशिश की तो फिर अंजाम भी बुरा ही होगा। कहा कि मुझे बड़ी जिम्मेदारी मिली है जो बड़ी चुनौती है, क्योंकि एक साल बाद चुनाव भी होने हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तराखंड को कई ड्रीम प्रोजेक्ट दिए हैं। त्रिवेंद्र रावत सरकार में भी दर्जनों अहम योजनाएं शुरू की गई। कार्यकर्ता केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को आम जन तक पहुंचाएं। इसमें किसी तरह की कंजूसी न करें। तीरथ ने कार्यकर्ताओं को कई संस्मरण भी सुनाए और कहा कि आज तो कार्यकर्ताओं के लिए अनुकूल माहौल है, लेकिन एक दौर में ऐसा कुछ नहीं था तो पुराने लोगों ने कैसे-कैसे करके पार्टी को यहां तक खड़ा किया होगा। कार्यकर्ताओं को इस पर भी मंथन करना होगा। अब वे गिनती के लोग पीछे हैं ही जिनके दम पर हम यहां पहुंचे, जबकि वैसे लोग आगे आ गए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आने वाले विधान सभा चुनावों में पार्टी को 60 से ज्यादा सीटें जिताने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। तीरथ ने कहा कि जिस दिन देहरादून में विधायक दल की बैठक थी, उसी दिन उनका लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सवाल लगा था। वे बिल्कुल देहरादून आने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन शाम को सात-आठ बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का फोन आया कि क्या देहरादून चले गए हो। मैंने उनसे कहा कि मेरा तो सदन में सवाल भी लगा है, तो उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को दून पहुंचना है। अध्यक्ष जी के निर्देश पर दिल्ली से दून के लिए रवाना हो गया। रात में नींद नहीं, शायद बाकी अन्य को भी नहीं आई होगी। हालांकि कभी कल्पना भी नहीं की थी और सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं सीएम बनूंगा, लेकिन जब बैठक में फैसला हुआ तो फिर यकीन हुआ। ऐसा सिर्फ भाजपा में ही हो सकता है जहां एक छोटे कार्यकर्ता को कब बड़ी जिम्मेदारी मिल जाए और बड़े कार्यकर्ता को छोटे की। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि विकास प्राधिकरणों से विधायक व मंत्री ही बदनाम होते रहे हैं, जबकि हकीकत में जेई व एई ही माल कमाते हैं। पहाड़ में लोगों के पास दो-चार नाली जमीन होती है, तो फिर वहां प्राधिकरणों की जरूरत ही क्या है। इसी वजह से एक झटके में उन्होंने पहली कैबिनेट में जिला विकास प्राधिकरण स्थगित करने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ दिव्य व भव्य हो। क्योंकि वैसे भी महाकुंभ 10-12 साल में आता है। अफसर उन्हें कोविड की गाइड लाइन का पाठ पढ़ाने लगे। अफसरों को साफ चेताया है कि जो भी कुंभ स्नान के लिए आना चाहते हैं, उन्हें बे रोक टोक आने दें। हां, आने वाले मास्क जरूर पहनें। दिल्ली में यदि पेशी होगी तो मेरी होगी। उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।

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