बाल अधिकारों की समस्याओं के संबंध में शिकायत शिविर का आयोजन, 117 शिकायतें पंजीकृत

हरिद्वार । राष्ट्रीय बाल शिविर में बाल अधिकारों का उल्लंघन, स्कूलों/पड़ोसियों द्वारा बच्चों का शोषण एवं स्कूलों में बुनियादी ढाँचे की कमी, बच्चों की प्रतियोगिता परीक्षा शुल्क संबंधी शिकायत, स्कूलों में बच्चों के साथ शारीरिक शोषण अथवा प्रताड़ना की शिकायत, बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं देना, विकलांगता संबंधी शिकायत, यौन शोषण से पीड़ित बच्चों को मुआवजा दिलाना, चिकित्सा संबंधी शिकायत, भेदभावपूर्ण व्यवहार, बालकों से विश्वासघात, बच्चों के रोग संबंधी उपचार में चिकित्सा लापरवाही, बच्चों का अपहरण, बाल श्रमिक के रूप में खतरनाक स्थान पर बच्चों का उपयोग, किसी भी प्रकार के परिश्रम या क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त न होना, बच्चों द्वारा सड़क पर सामान विक्रय करना, एसिड अटैक संबंधी मामले, माता-पिता/अभिभावक/किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बच्चों का भिक्षावृत्ति हेतु उपयोग करना, बच्चों को शारीरिक/लैंगिक हमला/परित्यक्त अथवा उपेक्षित किया जाना, घरों से पीड़ित बच्चें, एचआईवी से ग्रसित बच्चों से भेदभाव करना, पुलिस द्वारा शोषित/प्रताड़ित बच्चें, बाल देखरेख संस्थाओं में प्रताड़ित शोषित बच्चे तथा बच्चों को अवैध रूप से गोद लेना इत्यादि समस्याओं के संबंध में शिकायत शिविर का आयोजन कलेक्ट्रट सभागार रोशनाबाद में किया गया। शिविर की अध्यक्षता बाल संरक्षण आयोग भारत सरकार के मा0 सदस्य आर.जी. आनंद ने की। बालकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता एवं शिकायत निवारण शिविर में बच्चों से सम्बन्धित 117 शिकायतें पंजीकृत हुई। सभी शिकायतों पर सुनवाई करते हुए आयोग की बैंच ने शिकायतों का निवारण किया। शिविर में आयोग के सीनियर कंसलटेंट श्री आर.के. गौड़, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपेन्द्र कुमार चौधरी, मुख्य विकास अधिकारी श्री विनीत तोमर, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्री के.के. मिश्र सहित जिला पंचायतीराज, शिक्षा, समाज कल्याण, बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग आदि से सम्बंधित अधिकारीगण उपस्थित थे। जिनका माध्यम से मौके पर ही प्राप्त शिकायतों का निस्तारण किया गया। आयोग सदस्य ने बाल अधिकार के संरक्षण को अहम बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए किये जा रहे उपायों की जांच के लिए बाल सुधार गृहों का निरीक्षण किया गया है। सम्बधित विभाग बाल संरक्षण कानून का अनुपालन जिले भर में सुनिश्चित करायें। उन्होंने बताया कि शिविर में आयी शिकायतों पर आयोग स्वयं फोलोअप कर संज्ञान लेगा। एक सप्ताह के भीतर सभी शिकायतों को संतोषजनक निस्तारित कर समाप्त किया जायेगा। यदि इस प्रकिया में कोई भी विभाग और अधिकारी लापरवाही बरतता है तो उसको एक अनुस्मारक दिये जाने के बाद आयोग की ओर से सम्मन जारी किये जायेंगे। श्री आनन्द ने शिविर के लिए जिला प्रशासन की ओर से की गयी व्यवस्थाओ को संतोषजनक बताया। उन्होंने शिविर समापन पर इस बात की सराहना की। जिला प्रशासन बाल संरक्षणस के लिए गम्भीर है और मौके पर बालकों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, दिव्यांग प्रमाण पत्र, दिव्यांगों की सहायता के लिए उपकरण उपलब्ध कराने की प्रशंसा की। उन्होंने जिले को चाइल्स फ्रेंडली बताया। जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी आनंद भारद्वाज ने बालकों की शिक्षा के लिए राज्य में चल रही स्पोन्सर्ड’’ योजना की जानकारी लाभर्थियों को दी।

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