मध्यम वर्ग पर कोरोना कहर, एडवोकेट बृजेश त्यागी ने कहा बड़े नुकसान में पहुंच गए हैं मध्यमवर्ग परिवार

रुड़की । भारत में कोरोना कहर के चलते, लॉक डाउन की सबसे अधिक मार, लगभग 38 करोड़ की आबादी वाले मध्यमवर्ग पर पड़ी है। पिछले लगभग 4 महीने से आर्थिक मोर्चे पर जूझता छोटा व्यापारी, दुकानदार, लड़खड़ाता किसान, नौकरी पेशा अध्यापक, प्राइवेट कंपनियों में कार्यरत प्रोफेशनल्स, वकील और लघु उद्यमी आदि, सब टूट से गए हैं। मजबूर होते हुए भी, यह वर्ग मजदूर नहीं हो सकता। बी पी एल की परिभाषा में भी नहीं आता ।अपनी सामाजिक स्थिति को बनाए रखने के लिए, जरूरत में भी किसी के आगे हाथ नहीं फैला पाता। राष्ट्र की मुख्यधारा में चलना, देश में शांति व्यवस्था बनाए रखना और राष्ट्र के विकास में योगदान करना, अपना नैतिक कर्तव्य समझता है। विपत्ति के समय में सरकार की मदद करने एवं जरूरतमंदों की मदद करने के लिए सदैव तत्पर रहता है। आज इस मध्यम वर्ग के सामने अपना अस्तित्व बचाने की चुनौती है। आज कोई उसके दर्द को नहीं समझ पा रहा है। आर्थिक रूप से जर्जर हो चुके मध्यम वर्ग के सामने आज अपने परिवार के भरण-पोषण की चुनौती है। एक ओर रसोई खर्च से लेकर, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, बीमा की किस्त, गृह , वाहन या उच्च शिक्षा लोन की मासिक किस्त, जीएसटी और आयकर भुगतान, पुरानी लंबी बीमारियों के दवाइयों का खर्च, बच्चों के शादी विवाह आदि आदि प्रश्न उसे व्यथित किए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती हुई कीमतें, महंगाई और छुटती हुई नौकरियां, उसकी व्यथा को और बढ़ा रही है। कुछ राहत मिलने का भरोसा टूटता जा रहा है। था ऐलान कहानी में, एक रोज नदी भी आएगी, हमने इस उम्मीद में अब तक, खुद को प्यासा रखा है। कर्ज और खर्च के चक्रव्यूह मे जमा पूंजी गंवा चुके की गुल्लकें भी उसके अरमानों की तरह दम तोड़ रही है। गांव, कस्बे और शहर में रहने वाले इस मध्यम वर्ग की एक जैसी ही कहानी है। बिना किसी की मदद के, अपने बलबूते, अपने खोए हुए आत्मविश्वास को समेटते हुए, फिर से खड़े होने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्र में शांति और सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए, सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता है और सरकार का मनोबल बढ़ाता है। समझता है कि राष्ट्र रहेगा तो हम सब भी रहेंगे, यही सोच कर अपनी परेशानियां भूल कर, राष्ट्रहित में फिर आगे बढ़ने का काम करता है।
लेखक बृजेश त्यागी रुड़की बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष है और अच्छे राजनीतिक विश्लेषक भी माने जाते हैं।

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