जिला पंचायत में जीत के समीकरण बनाने की कवायद, दोनों खेमे रखे हैं एक दूसरे की रणनीति पर करीबी निगाह, राव आफाक की बैठक में जाने को तैयार नहीं है जिला पंचायत सदस्य

हरिद्वार । जिला पंचायत में जीत के समीकरण बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं। एक और भाजपा नेता सुभाष वर्मा अपने जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। तो दूसरी ओर पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत हरिद्वार चौधरी राजेंद्र सिंह उन पर दांव चलने की कोशिश में है। जिसके चलते दोनों खेमे एक दूसरे की रणनीति पर करीबी निगाह रखे हैं। आज जिला पंचायत सदस्य विजय पाल की सदस्यता समाप्त हो जाने के बाद सरगर्मियां और बढ़ गई। इस शासनादेश से जहां सुभाष वर्मा खेमे का मनोबल बढ़ा है। वहीं पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत हरिद्वार चौधरी राजेंद्र सिंह खेमे में खलबली है। दरअसल, चौधरी राजेंद्र सिंह खेमे को ऐसी कार्रवाई की आशंका दूर तक नहीं थी। इसीलिए शासनादेश जारी होने के बाद भी यह खेमा इस तरह की खबरों को अविश्वसनीय मानता रहा। लेकिन जब बहुत सारे लोगों के पास कार्रवाई संबंधी शासनादेश पहुंच गया तो तब जाकर माना कि वाकई विजयपाल की जिला पंचायत सदस्यता समाप्त हो गई है। वैसे तो पिछले कई दिनों से दोनों खेमे जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क बनाए हुए थे । लेकिन अब एक-एक सदस्य से बातचीत की जा रही है। उनका विश्वास जीतने के प्रयास हो रहे हैं ताकि चुनाव होने पर वह उनके साथ ही डटे रहे। सूत्रों ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है। हालांकि सविता चौधरी की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 4 नवंबर की तिथि निर्धारित है। इसीलिए दोनों खेमे ही संभलकर कदम बढ़ा रहे हैं। कानूनी दांवपेच में एक दूसरे को उलझाने के साथ ही धरातलीय स्थिति में भी पटखनी देने की कोशिश हो रही है। माना जा रहा है कि इसी कारण कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष राव आफाक जिला पंचायत बोर्ड की बैठक नहीं कर पा रहे हैं। उनके द्वारा अब तक दो बैठक बुलाई गई । लेकिन कोरम पूरा न होने के कारण दोनों ही बार बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब उनके द्वारा 10 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है। यह बैठक संपन्न हो जाएगी। इसको लेकर भी आशंका बनी हुई है। क्योंकि अधिकतर जिला पंचायत सदस्य दोनों खेमों में पूरी तरह बंट चुके हैं और वह किसी तीसरे खेमे में जाने को कतई तैयार नहीं है। वह मान रहे है कि यदि कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष राव आफाक की बैठक में वह पहुंचते हैं तो ऐसे में जिला पंचायत की सियासत में तीसरा कोण बन जाएगा। इस स्थिति में किसी एक खेमे का नुकसान जरूर होगा। क्योंकि सुभाष वर्मा और चौधरी राजेद्र सिंह खेमा चाहता है कि जिला पंचायत के पास जितना भी बजट है। लड़ाई जीतने के बाद वही खर्च करें। कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रयास है कि यह सारा विकास का बजट उनकी देखरेख में होने वाली बैठक के अनुसार ही खर्च हो। इसीलिए वह बार-बार बैठक बुला रहे हैं। इस बीच जिला पंचायत की सियासत को लेकर पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद शहजाद ,खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ,भाजपा के वरिष्ठ नेता सुबोध राकेश काफी सक्रिय हो गए हैं। पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद शहजाद के कई समर्थक जिला पंचायत सदस्य हैं। सही मायने में देखा जाए तो पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद शहजाद जिला पंचायत की सियासत में निर्णायक स्थिति में है। खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की भी जिला पंचायत की सियासत में अच्छी-खासी ताकत है। अब देखना यह है कि शुरू ही उठापटक किसके पक्ष में परिणाम लेकर शांत होती है।

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