बार-बार नेतृत्व परिवर्तन लोकतंत्र का मजाक, देवभूमि की जनता के साथ धोखा: आप

हरिद्वार। आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में एक बार फिर किए जा रहे नेतृत्व परिवर्तन को लोकतंत्र का मजाक और राज्य की जनता के साथ फिर से छलावा बताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर जम कर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा है कि भाजपा ने उत्तराखंड को मुख्यमंत्री बनाने की प्रयोगशाला बना दिया है। आज आप के रांनीपुर मोड़ कार्यालय में आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा और आप की पूर्व प्रदेश प्रवक्ता हेमा भण्डारी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने प्रदेश की जनता को स्थिर सरकार देने का वादा करते हुए कहा था कि प्रदेश में मुख्यमंत्रियों की अदला-बदली का खेल खत्म किया जाएगा, लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस वादे को कूड़ेदान में डाल दिया और सवा चार साल में ही तीन मुख्यमंत्री बना दिए हैं।
भाजपा के इस रवैये से लगता है कि चुनाव होने तक और भी नाम मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में जुड़ सकते हैं। पार्टी ने कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के साथ ही भाजपा को यह भी बता देना चाहिए कि उनकी मियाद कितने दिन की होगी ? आम आदमी पार्टी ने कहा कि तीरथ सिंह रावत को पहले मुख्यमंत्री बनाना और फिर संवैधानिक संकट की दुहाई देकर इस्तीफा दिला कर भाजपा ने उनकी नाकामियों पर पर्दा डालने का काम किया है। आप प्रदेश उपाध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा ने कहा,बीजेपी अपने सीएम को क्या एक सीट पर भी नहीं जीता सकते क्या ? जो इनको मैदान छोड़ कर भागना पड़ा है। इनका सवेधानिक संकट सिर्फ एक बहाना है । इन्होंने इलेक्शन कमीशन से पूछा ही नहीं क्योंकि इनको पूरा विस्वास था कि इनका सीएम हार रहा है और इनके सभी मंत्री,विधायक संगठन मिलकर अपने पिछले साढ़े चार साल के कुशासन के चलते ,अपने सीएम को उत्तराखंड की किसी भी सीट से नहीं जीता सकते इसलिए इनको मैदान छोड़कर भागना पड़ा। उन्होंने कहा,बीजेपी प्रचंड बहुमत के बाद भी प्रदेश को स्थाई सीएम नहीं दे पाई बल्कि सीएम बदलने का काम करती रही यही नहीं इनको भरोसा नहीं कि इनके सभी लोग मिलकर एक सीएम को जीता पाएंगे तो ये 2022 में कैसे इलेक्शन लड़ेंगे ये बड़ा सवाल है।वहीं आप के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कहा,हमने चुनौती क्या दी,सीएम साहब मैदान छोड़ कर भाग गए और सवेधानिक संकट का बहाना मार रहे जबकि इलेक्शन कमीशन ने इस बाबत कोई निर्णय नहीं लिया था यही नहीं कर्नल कोठियाल ने कहा, बीजेपी ने गंगोत्री में एक इंटरनल सर्वे करवाया था जिसमें निकला कि अगर सीएम यहां से लड़ते तो बुरी तरह हार रहे थे इसलिए इन्होंने बिना इलेक्शन कमीशन के निर्णय के सवेधानिक संकट का बहाना मारकर सीएम ने इस्तीफा दे दिया। जिला सचिव अनिल सती ने कहा, गौहाटी हाई कोर्ट ने भी 2017 में साफ कहा था कि Representation of people act में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि अगर एक साल से कम समय ,कार्यकाल का बचा हो तो इलेक्शन हो ही नहीं सकते हैं । जब ये साफ है इलेक्शन हो सकते तो क्यों बिना इलेक्शन कमीशन से पूछे बिना ,ये मैदान छोड़कर क्यों भागे। आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्रियों की अदला-बदली करने के लिए कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही दलों ने इन बीस वर्षों में मुख्यमंत्री बदलने के सिवा कुछ नहीं किया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखंड में फ्रेंडली मैच खेल रहे हैं। इन दोनों के बीच पांच-पांच साल तक बारी-बारी से प्रदेश को लूटने की गुप्त डील है, लेकिन इस बार प्रदेश की जनता इनकी असलियत जान चुकी है और 2022 में दोनों को ही करारा जवाब देने को तैयार है और उत्तराखंड की जनता अब भाजपा-कांग्रेस की इस छलावे वाली राजनीति से आजिज आ चुकी है और प्रदेश में कुर्सी की नहीं बल्कि काम की राजनीति चाहती है। आप सभी लोग इस पीआर को प्रमुखता से अपने नाम से भेज सकते हैं । सरकार से सवाल पूछ सकते हैं ।इसको प्रमुखता से भेजेगा।

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