विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाकर चलना आवश्यक : डाॅ. बत्रा, उत्तरांचल पंजाबी सभा, हरिद्वार नागरिक मंच तथा अभाविप ने काॅलेज परिसर में किया वृक्षारोपण

हरिद्वार । एस.एम.जे.एन.पी.जी. काॅलेज में आज कोरोना महामारी के चलते आयी आॅक्सीजन की भारी कमी के दृष्टिगत काॅलेज मैदान में उत्तरांचल पंजाबी सभा, हरिद्वार नागरिक मंच तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर काॅलेज के संयुक्त संयोजन में सैकड़ों पौधों को रोपित किया गया। सर्वप्रथम काॅलेज में निर्मित शौर्य दीवार पर देश के वीर शहीदों को नमन किया गया। इस अवसर उत्तरांचल पंजाबी महासभा (रजि.) के जगदीश लाल पाहवा ने कहा कि हमारा वृक्षों के साथ बहुत गहरा व सूक्ष्म सम्बन्ध है। हमारे जीवन का प्रत्येक क्षण वृक्षों से सम्बन्ध रखता है। पृथ्वी पर हमारे सबसे नजदीकी मित्र वृक्ष हैं, जब आप वृक्ष काटते हैं तो समझइये कि आप अपनी जीवन शक्ति पर ही प्रहार कर रहे हैं और अपनी ही परेशानियों को बढ़ा रहे हैं। यदि हम वृक्षों को उगायेंगे तथा उनका पालन पोषण कर आगे बढ़ायेंगे जो मानव कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। प्रसिद्ध समाज सेवी सुनील अरोड़ा ने कहा कि हमें वृक्षों के महत्व को समझना होगा। ऋषि-मुनियों ने भी वृक्षों को सूर्य, चन्द्रमा, गंगा की तरह पवित्र मानकर इसकी पूजा करने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि एक वृक्ष जितनी आक्सीजन अपने पूरे जीवन में देता है वह कई व्यक्तियों को जीवन दे सकता है। अतः वृक्ष लगाना व उनका संरक्षण करना बहुत आवश्यक है। उत्तरांचल पंजाबी महासभा (रजि.) के राजू ओबेराय ने कहा कि यदि हम प्रकृति के विरूद्ध जायेंगे और अपने लालच की पूर्ति के लिए उसके ससांधनों का अंधाधुंध दोहन करेंगे तो हम अपने विनाश को निमंत्रण देंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक आपदा के चलते आॅक्सीजन की जो भारी किल्लत समाज के सम्मुख आयी है, महामारी के दृष्टिगत उत्तरांचल पंजाबी सभा (रजि.) ने निरन्तर वृक्षा रोपण करने का निर्णय लिया है, जिसमें आप सभी का सहयोग भी अपेक्षित है।
काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा ने उत्तरांचल पंजाबी महासभा (रजि.) के समाजहित व जनहित के निर्णय वृक्षारोपण का स्वागत किया। हरिद्वार नागरिक मंच तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को स्थापना दिवस की शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें अनेक प्रकार के वृक्ष और जड़ीबूटियाँ दी हैं, जो हमें प्राण वायु के रूप में आक्सीजन देते हैं। प्रकृति के रूप में वृक्ष हमारा पालन-पोषण व स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं परन्तु विकास की अंधी दौड़ में हम अनायास ही वृक्षों पर कुल्हाड़ी चलाकर अपने जीवन पर ही प्रहार कर रहे हैं। प्राचार्य ने आह्वान किया कि विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाकर चलना आवश्यक है तथा वृक्ष रहेंगे तो मानव जीवन रहेगा। अधिष्ठाता छात्रा कल्याण डाॅ. संजय कुमार माहेश्वरी ने धन्यवाद प्रेषित करते हुए कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही भगवान शिव की सच्ची आराधना है। प्रकृति हमारी माँ है और उसके बिना हमारा अस्तित्व सम्भव नहीं है। इस अवसर पर राजू ओबेराय, श्रीमती कंचन तनेजा, कुंज भसीन, नितिन जग्गी, प्रवीण गाबा, अक्षय मल्होत्रा, अक्षत कुमार कुमार, चेतन कोचर, अमित बजाज, प्रमोद पांधी, संजय शर्मा, रोहित सहगल, अनिल कुमार, कर्ण मल्होत्रा, कामिनी सड़ाना, मीनाक्षी छाबड़ा, मोनिका चुघ, श्रीराम अरोड़ा, आदर्श कश्यप, भरत तनेजा, डाॅ. जगदीश चन्द्र आर्य, विनय थपलियाल डॉ सुषमा नयाल, डॉ पद्मावती तनेजा, प्रिंस श्रोरतीय, विनीत सक्सेना आदि उपस्थित थे।

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