विश्वविद्यालयों के संस्कारों ने देश को नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के 36वें ज्ञानदीक्षा समारोह में बोले शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक

हरिद्वार । देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के 36वें ज्ञानदीक्षा समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय अपने कठिन दौर में है, ऐसे समय में युवा शक्ति को जाग्रत करने के लिए उनके आंतरिक ऊर्जा को जगाना होगा। युवाओं में संस्कृति व संस्कार के बीज बोने होंगे। विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को चरित्रवान बनाये जाने चाहिए, शिक्षण संस्थानों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व चरित्र से शिक्षित कर अपने शिष्यों को भारतीय संस्कृति को विश्व के कोने-कोने में फैलाने के लिए भेजा था, उसी तरह देसंविवि के विद्यार्थी भारतीय संस्कृति एवं संस्कार के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि 2020 एक नई क्रांति लेकर आया है। समारोह के मुख्य अतिथि नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि किसी समय तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालय का जो स्वरूप हुआ करता था, उसी तरह आज देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का स्वरूप दिखाई देता है। यहाँ जो संस्कार मिलता है, उससे युवाओं में भारतीय संस्कृति के प्रति रुझान पैदा होता है। कौशिक ने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा बदलाव का केन्द्र रहा है। विश्वविद्यालयों के संस्कारों ने देश को नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ज्ञानदीक्षा समारोह युवाओं में ऐसे ही सुसंस्कार के बीज बोने का काम करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में जब कभी कोई दैवीय या प्राकृतिक आपदा आती है, वहाँ शांतिकुंज परिवार सबसे पहले सहयोग के लिए खड़ा मिलता है। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने कहा कि राज्य में 502 डिग्री कॉलेज, 11 सरकारी विश्वविद्यालय व 18 निजी विश्वविद्यालय है, इन सबमें फिट इंडिया, ग्रीन व क्लीन कैम्पस, नशामुक्त, रक्तदान शिविर, एक छात्र-एक वृक्ष जैैसे अभियान चलाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानदीक्षा जैसे कार्यक्रम होने से उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रैगिग की समस्या कम हुई है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि देसंविवि की तरह देश भर के विश्वविद्यालयों में भी ज्ञानदीक्षा कार्यक्रम चलाये जाने चाहिए। इससे पूर्व प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ज्ञान दीक्षा समारोह की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। कुलाधिपति ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों एवं आचार्यों को मिलकर शिक्षण कार्य एवं व्यक्तित्व विकास के साथ आगे बढ़ने का दीक्षा संकल्प दिलाये। इस दौरान अतिथियों एवं कुलाधिपति ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को देसंविवि का प्रतीक चिह्न प्रदान किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने मंत्री मदन कौशिक व डॉ. धन सिंह रावत को स्मृति चिन्ह, एवं युगसाहित्य भेंटकर सम्मानित किया। समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि व कुलाधिपति ने ई-रेनासा, संस्कृति संचार, संस्कृति ट्रेवल साल्यूशन, एल्युमिनी एशोसिएशन का विमोचन किया। कुलसचिव बलदाऊ देवांगन ने बताया कि देसंविवि के 36वें ज्ञानदीक्षा समारोह में छः मासीय पाठ्यक्रम- योग विज्ञान, धर्म विज्ञान एवं समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए लिथुआनिया सहित उत्तराखण्ड, बिहार, छग, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, हिमालच प्रदेश, झारखंड, मप्र, उप्र तथा पश्चिम बंगाल से आये नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को ज्ञानदीक्षा के सूत्र से दीक्षित किया गया। उदय किशोर मिश्र ने ज्ञान दीक्षा का वैदिक कर्मकाण्ड तथा डॉ. गोपाल शर्मा ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर ऋषिकेश की मेयर अनिता ममगई, शांतिकुंज व देसंविवि परिवार सहित विभिन्न राज्यों से आये गणमान्य लोग, एनसीसी कैडेट्स व अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी तथा पत्रकारगण उपस्थित रहे।

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