अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही कला, जिस जाति की कला जितनी समृद्ध और सुन्दर होगी, वह जाति उतनी ही गौरवशाली और प्राचीन होगी

माहीन खान, देहरादून । संसार के सभी जीवों में मनुष्य श्रेष्ठ है । उसके पास बुद्धि और विवेक के रूप में दो ऐसी नैसर्गिक शक्तियाँ हैं, जिनके कारण वह अन्य जीवों से ऊँचा उठ पाया है। आत्मरक्षा की प्रवृत्ति और प्रजनन क्षमता लगभग सभी जीवों में पाई जाती है और वे इनसे सन्तुष्ट हो जाते हैं, परन्तु मनुष्य केवल इससे ही सन्तुष्ट होकर नहीं रह जाता । सम्भवत: यही विचार कला के जन्म का मूल है। देहरादून निवासी कलाकार माहीन खान कला के बारे में बताती हैं कि अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही कला है। कला का सम्बन्ध केवल स्वानुभूति से प्रेरित प्रक्रिया से है । जब कोई कलाकार स्वानुभूति को सहज, स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्त कर देता है, तो वही कला का रूप धारण कर लेती है ।कला, कलाकार के आनन्द के श्रेय और प्रेम तथा आदर्श और यथार्थ को समन्वित करने वाली प्रभावोत्पादक अभिव्यक्ति है ।वास्तव में कला सुन्दरता की अभिव्यक्ति है और समृद्धि की परिचायक है । कहा जाता है कि जिस जाति की कला जितनी समृद्ध और सुन्दर होगी, वह जाति उतनी ही गौरवशाली और प्राचीन होगी । इसीलिए कला को किसी भी राष्ट्र की संस्कृति का मापदण्ड भी कहा जाता है । जब व्यक्ति भौतिक रूप से सुरक्षित होता है और उसे किसी बात का भय नहीं होता, तब वह मानसिक और आत्मिक सन्तुष्टि को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत होता है । इस क्रम में जब उसकी अतिरिक्त ऊर्जा सौंदर्न्यानुभूति के रूप में प्रकट होती है, तो कला कहलाती है । कला निरन्तर ऊँचा उठने के प्रगतिशील विचार की परिचायक है । इसी के माध्यम से नवीन विचारों, आचार और मूल्यों का सृजन होता है । कला की दृष्टि से भारत बहुत समृद्ध है । भारत को विविधता का देश कहा जाता है । कला के सन्दर्भ में भी भारत में बहुत विविधता है, जो इसे संसार के अन्य सभी देशों से विशिष्ट बनाती है । भारत की कलाएँ और उनसे जुड़ी कृतियाँ बहुत ही पारम्परिक और साधारण होने पर भी इतनी सजीव और प्रभावशाली हैं कि उनसे देश की समृद्ध और गौरवशाली विरासत का स्वतः ही अनुमान हो जाता है । कला और जीवन का बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध है । कला के विकास का उद्देश्य कभी आत्मानुभूति होता है, तो कभी आनन्द और विनोद । कला के माध्यम से कभी संघर्ष किया जाता है, तो कभी उस संघर्ष से मुक्ति पाई जाती है । कला यश-प्राप्ति, धन-प्राप्ति, शान्ति-प्राप्ति तथा समाज को सही राह दिखाने का माध्यम भी बनती है। कला को प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतर मंच मिले तो कलाकार अपनी कला से विश्व पलक पर चमक बिखेर सकता है।

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