मेयर गौरव गोयल और शहर विधायक प्रदीप बत्रा की मुलाकात से बढ़ी सियासी गर्माहट, गौरव गोयल की जल्द घर वापसी के लगाए जा रहे हैं कयास

रुड़की । मेयर और शहर विधायक की मुलाकात के बाद से शहर की सियासत में गर्माहट बढ़ी हुई है। तब से ही मेयर गौरव गोयल की जल्द घर वापसी के कयास भी लगाए जा रहे हैं। यानी कि वह फिर से भाजपा की सक्रिय राजनीति में आ जाएंगे। हालांकि रात में जब मेयर गौरव गोयल ने शहर विधायक प्रदीप बत्रा से उनके आवास पर मुलाकात की तो तभी से भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मयंक गुप्ता गुट काफी चौकन्ना बना हुआ है। इस गुट के लोग नहीं चाहते हैं कि गौरव गोयल की फिर से भाजपा में वापसी हो। इसकी एक नहीं बल्कि कई वजह हैं। यदि गौरव गोयल की भाजपा में वापसी होती है तो पार्टी में वैश्य राजनीति को लेकर फिर से सुरेश जैन बनाम मयंक गुप्ता जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। जिस तरह से पहले हर पद और टिकट को लेकर सुरेश जैन और मयंक गुप्ता के बीच तलवार खिचती रही है। मेयर के आने के बाद मयंक गुप्ता और गौरव गोयल के बीच उसी तरह से टकराव शुरू हो जाएगा। मयंक गुप्ता के समर्थक अब उनकी राजनीति में कोई किसी तरह की बाधा नहीं चाहते। इसीलिए कल से ही वह इन प्रयासों में लगे हैं कि गौरव गोयल किसी भी तरह से भाजपा में न आ सके। जबकि पार्टी का एक धड़ा गौरव गोयल की भाजपा में जल्द वापसी चाहता है । विशेष रूप से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक व पार्टी के कई विधायकों की इच्छा यही है कि गौरव गोयल कि जल्द से जल्द घर वापसी हो। मयंक गुप्ता के समर्थकों को लग रहा है कि गौरव गोयल की भाजपा में पुन: वापसी के लिए शहर विधायक प्रदीप बत्रा व पार्टी के अन्य कुछ नेता और विधायक लगे हुए हैं। इसीलिए कल से मयंक गुप्ता के समर्थकों का रुख शहर विधायक के प्रति भी काफी आक्रामक बना हुआ है। इसी वजह से शहर की सियासत में काफी गर्माहट बढ़ी हुई है। वही इस बीच गौरव गोयल के काफी समर्थक सुरेश जैन, डॉ अनिल शर्मा आदि कई नेताओं का उदाहरण दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि गौरव गोयल तो निर्दलीय ही चुनाव लड़े। जबकि पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन ने तो भाजपा छोड़कर कांग्रेस के सिंबल पर विधानसभा का चुनाव लड़ा । वह उस दिन के घटनाक्रम का विस्तार से बखान कर रहे हैं जिस दिन सुरेश जैन ने जब भाजपा छोड़कर कांग्रेस से चुनाव लड़ा था।। तब उनके समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ,भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक के खिलाफ जमकर जहर उगला था। उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। और उनके पुतले तक फुके थे। लेकिन गौरव गोयल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। पर उनके द्वारा कही किसी भाषण या रैली में एक बार भी भाजपा, भाजपा अध्यक्ष प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या शहर विधायक के खिलाफ कोई टीका टिप्पणी नहीं की गई । ऐसे में उनकी घर वापसी से किसी को क्या एतराज हो सकता है। गौरव गोयल समर्थकों का यह भी कहना है कि यदि उनकी घर वापसी के बाद किसी को अपने पद या टिकट को लेकर कोई किस तरह की आशंका उत्पन्न हो रही है तो ऐसा नहीं होना चाहिए। वहीं शहर विधायक प्रदीप बत्रा के समर्थकों का कहना है कि रुड़की नगर निगम की सियासत में पार्टी हाईकमान को ही निर्णय लेना है। विधायक तो यहां की जन भावनाओं से हाईकमान को अवगत मात्र करा सकते हैं। इस बीच केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के समर्थक तो आज भी गौरव गोयल को भाजपा में ही मान रहे हैं। उनका कहना है कि गौरव गोयल ने जब कोई पार्टी ज्वाइन नहीं की है तो ऐसे में उन्हें किसी अन्य पार्टी का कैसे मान लिया जाएगा। हालांकि मेयर गौरव गोयल ने आवास विकास में आयोजित सम्मान समारोह में कहा है कि जनता ही उनकी पार्टी है। कहने का मतलब साफ है कि वह भी अभी पत्ते खोलने के मूड में नहीं है। उनकी पार्टी के स्थानीय नेताओं के रुख पर करीबी निगाह है। कहां जा रहा है कि जब भी सियासी समीकरण और माहौल उनके पक्ष में होगा तो तभी वह इस ओर अपना निर्णय सुनाएंगे।

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