समारोह में खूब हुई ट्रैक्टर और विद्युत उपकरण खरीद की चर्चा, हाईवे पर पोल लगाए जाने का टेंडर एक चर्चित ठेकेदार को दिए जाने का मामला भी रहा सुर्खियों में, महंगी डस्टबिन और बोलेरो खरीदे जाने पर भी उठे सवाल

रुड़की । उनका तो शपथ ग्रहण का था। मेयर और पार्षदों ने समारोह में शपथ ली भी। लेकिन इस बीच जो नगर निगम की सियासत के अलावा चर्चा हुई वह ट्रैक्टर ,विद्युत उपकरण और बोलेरो खरीदे जाने की अधिक हुई। सब लोग यह जानने की कोशिश में लगे रहे कि आखिरकार नगर निगम प्रशासन ने ट्रैक्टर ,विद्युत उपकरण और बोलेरो खरीदने में इतनी जल्दबाजी क्यों की है। जब नया नगर निगम बोर्ड अस्तित्व में आने ही वाला था तो फिर अधिकारियों ने इस काम में बहुत अधिक उतावलापन क्यों दिखाया है। हाईवे पर लगने वाले पोल का टेंडर किसी चर्चित ठेकेदार को क्यों दिया गया। जब पुराने बोर्ड के दौरान ₹22000 कीमत की डस्टबिन खरीदी गई थी तो इस बार ₹80000 से अधिक की कीमत की डस्टबिन कैसे खरीदी गई। क्या डस्टबिन की कीमत इतनी बढ़ गई है क्या। हालांकि नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था दुरुस्त रखने में व्यस्त रहे। इसीलिए वह इन सवालों का जवाब नहीं दे पाए। जिस कारण समारोह में आए लोग के जेहन में यह बात बैठ गई है कि वाकई ही नगर निगम में बहुत गड़बड़ियां हुई हैं। करोड़ों रुपए बजट की बंदरबांट कर दी गई है। वैसे एक कर्मचारी ने पोल लगाए जाने के टेंडर पर सफाई भी दी और उसने कहा भी कि अभी यह टेंडर खुला नहीं है। उसने लोगों को यह भी समझाने की कोशिश की कि मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 1 करोड रुपए के पोल दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर लगने हैं। यह टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई थी। लेकिन तभी नगर निगम के चुनाव की आचार संहिता लग गई थी। इसीलिए प्रक्रिया रोक दी गई थी। लेकिन वहां पर मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि भले ही अब कोई कुछ सफाई दे । लेकिन टेंडर एक चर्चित ठेकेदार को दे दिया गया है। नगर निगम के अन्य कुछ मामलों को लेकर भी खूब चर्चा रही। विशेषकर सहायक नगर अधिकारी के बारे में लगातार बातचीत होती रही। समारोह में मौजूद लोगों का कहना था कि एक सहायक नगर अधिकारी को कई-कई जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि 1 सहायक नगर अधिकारी को मात्र एनओसी जारी करने का काम दिया गया है। एक कर्मचारी को भी मलाईदार सीट दी गई है। यहां पर सवाल तो न जाने और भी कितने उठे। ले किन सबकी राय यही रही कि पिछले कुछ महीनों में जितनी भी गड़बड़ी हुई। उनकी नवनिर्वाचित बोर्ड को जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से मेयर गौरव गोयल को अपनी छवि बनाए रखने के लिए सारे मामलों पर स्थिति स्पष्ट करानी चाहिए। जांच में जितनी भी गड़बड़ियां सामने आए। उसमें कार्रवाई करानी चाहिए। जानकारी के लिए बता दें कि नगर निगम के पास करीब साढे़ ₹190000000 का बजट था अब इसमें से काफी बजट खर्च कर दिया गया है करीब 3 करोड रुपए का बजट तो हूं कुछ ही दिन के भीतर निपटा दिया गया है। हालांकि नगर निगम की मुख्य नगर अधिकारी नूपुर वर्मा का कहना है कि सभी कार्य नियम अनुसार हुए हैं उनका कहना है कि ट्रैक्टर इसलिए खरीदे गए क्योंकि सफाई व्यवस्था के लिए संसाधन कम पड़ रहे थे। और कहीं पर भी सरकारी बजट का दुरुपयोग नहीं किया गया है। हालांकि आम जनता मुख्य नगर अधिकारी का यह पक्ष स्वीकार करने को तैयार नहीं है जब तक के मेरा स्तर से इस संबंध में जांच कराने के बाद पूरी तरह स्थिति स्पष्ट न कर दी जाए। कई नए पार्षद भी इस बात को लेकर काफी चिंतित नजर आए कि पिछले कुछ समय में ही बहुत बड़ा बजट ठिकाने लगा दिया गया है। उनका कहना है कि जब इतना बड़ा बजट पहले ही ठिकाने लगा दिया गया है तो अब नया बोर्ड कहां से विकास कार्य कराएगा।

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