ऐसे नहीं हो पाएगी सैनी राजनीति की वापसी, एक दूसरे को हराने की कोशिश में अर्श से फर्श पर आ गए सैनी राजनीतिज्ञ

रुड़की । सैनी राजनीति का उदय इस तरह से नहीं हो पाया। मसलन एक दूसरे को हराने के लिए सैनी राजनीति अर्श से फर्श पर है। कभी रुड़की क्षेत्र में सैनी राजनीति का रुतबा हुआ करता था। पूर्व के समय की बातों को छोड़कर पिछले दो दशक की बात ही कर ली जाए तो सैनी राजनीति हरिद्वार राजनीति के परिदृश्य से गायब हो गई है। राज्य गठन के बाद से न तो सैनी समाज का कोई नेता विधानसभा पहुंचा और ना ही लोकसभा में मुकाबले का चुनाव लड़ा। जिला पंचायत अध्यक्ष बनना तो दूर जिला पंचायत सदस्यों की संख्या भी कभी छ्ह तक नहीं पहुंच पाई। निकाय की सियासत से सैनी समाज पूरी तरह बेदखल है। जिला सहकारी बैंक की सियासत में सैनी राजनीति का जिक्र तक नहीं। ऐसा इसलिए हो रहा है कि सैनी समाज के अधिकतर नेता एक-दूसरे को हराने की सियासत कर रहे हैं। कई बार आवेश में ऐसे भी निर्णय समाज के नेताओं द्वारा लिए जा रहे हैं जिससे कि सैनी राजनीति को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अब देखिए कि लक्सर में सैनी समाज के नेता ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। बावजूद इसके भाजपा प्रत्याशी संजय गुप्ता वहां पर फिर भी जीत गए। कहने का मतलब साफ है कि सैनी समाज के नेता को यदि चुनाव लड़ना ही था तो जीत का चुनाव लड़ना चाहिए था और यदि जीत का चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे तो फिर भाजपा का प्रत्याशी जीतने नहीं देना चाहिए था। तभी उनकी और उनके समाज की राजनीतिक मजबूती साबित होती। अब वहां पर स्थिति कुछ इस तरह उभरी कि सैनी समाज के समर्थन के बिना भी भाजपा जीत सकते हैं । अन्य कुछ विधानसभाओं में भी सैनी समाज के नेताओं ने कुछ ऐसा ही किया है। वैसे तो शुरूआत बहादराबाद विधानसभा से होती है । जहां पर डॉ पृथ्वी सिंह विकसित चुनाव लड़े थे तो उनके सामने पूर्व मंत्री रामसिंह सैनी जा लड़े थे। नतीजा दोनों दिग्गज हार गए थे और इसके बाद से सैनी समाज का कोई नेता विधानसभा का चुनाव जीत नहीं पाया। यहां तक की आमने-सामने के मुकाबले में भी मुश्किल ही आ पाया। पिरान कलियर विधानसभा में 2012 में श्यामवीर सैनी भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े। लेकिन समाज के ही अधिकतर नेताओं ने उन्हें चुनाव में हराने का काम किया। नतीजा यह हुआ कि वह तीसरे नंबर पर रहे। वर्ष 2017 में जय भगवान सैनी पिरान कलियर विधानसभा सीट से भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े तो सैनी समाज के ही बहुत सारे नेताओं ने उन्हें हराने का काम किया। जिसके चलते वह चुनाव हार गए। वर्ष 2012 में पूर्व मंत्री राम जी सैनी लक्सर विधानसभा सीट से कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़े । जिसमें सैनी समाज ने ही उन्हें कोई खास वोट नहीं दिया और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में डॉक्टर राम सुभग सैनी रुड़की विधानसभा से चुनाव लड़े ।यहां पर सैनी समाज नहीं उन्हें नकार दिया। नतीजा यह रहा कि वह जीत हार के गणित से ही बाहर हो रहे। अब इसके बाद निकाय के चुनाव हुए तो झबरेड़ा नगर पंचायत में दीपक सैनी भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े। लेकिन उन्हें अन्य बिरादरी के तो वोट मिल गए पर अपनी बिरादरी के वोट उनसे छिटक गए । जिसके चलते वह हार गए। अब लड़की नगर निगम में सुभाष सैनी चुनाव लड़े तो उन्हे उनकी बिरादरी ने उन्हें उतना वोट नहीं दिया। जितना कि यहां पर समाज के नेताओं द्वारा दावे किए जाते हैं। बता दें कि सैनी समाज के नेताओं का कहना है कि रुड़की में 25000 सैनी वोट है। कोई कहता है 20000 तो कोई कहता है 15000। लेकिन अब सवाल उठता है कि जब सैनी समाज का इतना वोट नगर निगम में है तो फिर सुभाष सैनी को 5000 वोट क्यों मिले। यहां पर साफ हो जाता है कि या तो सैनी समाज का वोट बहुत कम है । नेताओं के दावे गलत है और यदि सैनी समाज के वोट बहुत अधिक है तो फिर समाज के ही नेताओं ने अपनी बिरादरी के सुभाष सैनी को वोट देने से रोका। राजनीतिक जानकार बता रहे हैं कि यदि सैनी समाज में इसी तरह से एक दूसरे को हराने का काम चलता रहा तो निश्चित रूप से सैनी समाज की राजनीति की उन्हें वापसी नहीं हो पाएगी। विधानसभा हो निकाय हो । सब में सैनी समाज की सियासत फर्श पर ही रहेगी ।कहना है कि जिन नेताओं ने अब सुभाष सैनी को हराने का काम किया है तो निश्चित रूप से जो लोग अब सुभाष सैनी के साथ लगे रहे। वह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पिरान कलियर विधानसभा से लड़ने वाले अन्य सैनी नेता को हराने का काम करेंगे। क्योंकि उनमें रोष है और वह इस बात को लेकर नाराज है कि सैनी समाज के नेताओं को रुड़की में सुभाष सैनी को मेयर पद पर हराने का काम नहीं करना चाहिए था। उन्हें देखना चाहिए था कि भविष्य में उन्हें भी चुनाव मैदान में उतारना है। राजनीतिक जानकार स्पष्ट करते हैं कि हालात कुछ ऐसे बने हुए हैं कि सैनी समाज का वनवास इतना जल्द समाप्त होने वाला नहीं है।

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