प्रजापति समाज को बर्तन बनाने के लिए दिए गए मिट्टी के पट्टे पर अधिकतर कब्जा, राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति ने सीएम त्रिवेंद्र रावत को पत्र सौंपकर कब्जा मुक्त कराने की मांग की

रुड़की । राज्यमंत्री शोभाराम प्रजापति ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर कहा है कि कुम्हार/ प्रजापति जो कि शिल्पकार जाति से संबंध रखते हैं एवम् मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने परिवारों का जीवन यापन करते है। यह कार्य इन लोगों के द्वारा तभी किया जा सकता है जब इन कलाकारों को इस कार्य हेतु उचित मात्रा में एवम् कार्यस्थल के समीप मिट्टी उपलब्ध हो। विगत वर्षों में इनके सामने मिट्टी की विकट समस्या पैदा होने के कारण ये समाज अपना कार्य नहीं कर पा रहा । इन लोगों के आस पास ना तो मिट्टी उपलब्ध है और मिट्टी उपलब्ध ना होने के कारण ये लगातार बढ़ती बेरोजगारी से जूझ रहे है । जिसके कारण माटी कला बोर्ड उद्योग के लिए भी चिंता का विषय है अत: महोदय से अनुरोध है कि प्रदेश में चिन्हित जगहों पर मिट्टी उपलब्ध कराने हेतु आदेश पारित किए जाएं ताकि इनके सामने रोजगार का संकट पैदा ना हो। सरकार द्वारा जो कुम्हार/प्रजापति को बर्तन बनाने के लिए मिट्टी के पट्टे दिए गए थे उन पर ज्यादातर कब्जे कर लिए गए हैं -कृपया उन पट्रो को कब्जा मुक्त करा जाए ताकि माटी कला जीवित रह सके और हानिकारक प्लास्टिक क्रोकरी से भी मुक्ति मिल सके। इस समाज के लोगों के सामने एक और समस्या है यह है कि ये लोग अपने बनाए गये बर्तनों को बेचने कहां जाए, कहा इनका बाजार हो । इसके समाधान के लिये आप से अनुरोध है कि शहरो में किसी उचित स्थान पर इनकी जगह निर्धारित करके इनको अपने बर्तन बेचने हेतु उचित स्थान का आबंटन किया जाए ताकि ये अपने बर्तनों को वहां रखकर बेच सकें, एवम् इनका काम सुचारू रूप से चल सके।मिट्टी से बर्तन बनाने की कला आज लुप्त होने की कगार पर है इसका मुख्य कारण यह कला कालांतर में उपेक्षित रही है किसके कारण प्लास्टिक से बनी क्रोकरी का समाज में प्रयोग बढ़ गया इस कारण से इस कला पर पिछली सरकारों का उचित ध्यान ना देने के कारण एवम् इस कला के विकास हेत कभी भी कोई प्रशिक्षण केंद्र का गठन नही करने के कारण आज इन कलाकारों की संख्या कम होती जा रही है माननीय से अनुरोध है कि प्रदेश में माटी कला को जीवित रखने के लिये माटी कला परशिक्षण केंद्र खोले जाने की नितांत आवश्यकता है। अत:चिन्हित चार जगहों (देहरादून, रुड़की,काशीपुर खटीमा) में इस कला के प्रशिक्षण केंद्र खोल कर उनमें इस कला के प्रशिक्षण एवम् विकास की उचित व्यवस्था की जाए।

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