तपोनिधि श्री पंचायती आनन्द अखाड़े की पेशवाई धूमधाम से निकली, हैलीकाॅप्टर से की गई पुष्पवर्षा, महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज बोले, सनातन संस्कृति की विशेषताओं को प्रस्तुत करती है अखाड़ों की पेशवाई

हरिद्वार । हरिद्वार में आयोजित हो रहे कुंभ मेले में अखाड़ों की पेशवाई निकलने का क्रम जारी है।शुक्रवार को एसएमजेएन कालेज परिसर अस्थाई छावनी से आनन्द अखाड़े के नागा सन्सासियों व संतों की पेशवाई पूरे धूमधाम से निकाली गयी। अखाड़े के इष्ट सूर्य देव की पूजा अर्चना के बाद रवाना हुई पेशवाई की अगुवाई आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने की। बैण्ड बाजों के साथ निकली पेशवाई में सबसे आगे अखाड़े की धर्मध्वजा, उसके पीछे फूलों से सजी बग्घी पर विराजमान आचार्य महामण्डलेश्वर बालकानंद गिरी महाराज चल रहे थे। उसके बाद हाथी, घोड़ों व ऊंट पर सवार अखाड़े के अन्य संत चल रहे थे। पेशवाई में युद्ध कौशल का प्रदर्शन कर रहे नागा सन्यासियों को देखने के लिए पूरे रास्ते पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। जगह-जगह लोगों ने संतों का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। पेशवाई के शुभारंभ पर जिला अधिकारी सी.रविशंकर, मेला अधिकारी दीपक रावत, अपर मेला अधिकारी हरबीर सिंह, मेला आईजी संजय गुंज्याल, एसएसपी सेंथिल अबदुई कृष्णराज एस, एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय आदि ने भी पूजा अर्चना में भाग लेकर संतों का आशीर्वाद लिया। पेशवाई में शामिल संत महापुरूषों पर हैलीकाॅप्टर से पुष्पवर्षा की गयीी। एसएमजेएन कालेज से शुरू हुई जमात चंद्राचार्य चैक, शंकर आश्रम, सिंहद्वार, कृष्णानगर, बंगाली मोड़, शंकराचार्य चैक, तुलसी चैक, शिवमूर्ति होते हुए अखाड़े की छावनी में संपन्न हुई। पेशवाई के दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया था। कुंभ मेला आईजी संजय गंुज्याल, मेला एसएसपी जनमेजय खण्डूरी, जिले के पुलिस कप्तान सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस, एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय आदि स्वयं सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लेते रहे। आनन्द पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने सभी को कुंभ मेले की बधाई देते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़ा परंपरा के तहत अनादि काल से अखाड़े धर्म संस्कृति की रक्षा का उत्तरदायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान निकलने वाली अखाड़ों की पेशवाई सनातन संस्कृति विशेषताओं को प्रदर्शित करती है। जिन स्थानों चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है। उनमें हरिद्वार प्रमुख तीर्थ है। भगवान शिव की नगरी हरिद्वार उत्तराखण्ड का प्रवेश द्वार है तथा उत्तराखण्ड में स्थित चार धाम सनातन धर्म का गौरव हैं। सभी को तीर्थ की मर्यादा की रक्षा के लिए सदैव संकल्पबद्ध रहना चाहिए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने पेशवाई के लिए आनन्द अखाड़े को बधाई देते हुए कहा कि जमात के रूप में अपने ईष्टदेव के साथ नागा संयासियों व संतों का छावनी प्रवेश कुंभ का महत्वपूर्ण चरण है। नागा संयासियों व संत महापुरूषों के छावनी प्रवेश के बाद ही कुंभ मेला सही रूप में शुरू होता है। उन्होंने कहा कि कुंभ दर्शन से भक्तों के मन में श्रद्धा व उत्साह बढ़ता है। जिससे व धर्म के मार्ग पर अग्रसर होते हैं। कुंभ मेला संपूर्ण विश्व को धर्म का सकारात्मक संदेश प्रदान करता है। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज व श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि निंरजनी के बाद आनन्द अखाड़े के संतों के छावनी प्रवेश के साथ कुंभ से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां तेजी से शुरू हो जाएंगी। कुंभ पर्व आस्था का केंद्र बिन्दु है। गंगा के तट पर किए गए अनुष्ठान अवश्य ही कल्याणकारी होते हैं। कोरोना काल के चलते भी बड़ी संख्या में संत महापुरूषों के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ रही है। संत महापुरूषों के प्रति आमजन की आस्था सनातन संस्कृति की विशेषताओं को दर्शा रही है। देश की आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार में प्रतिदिन श्रद्धालुओं को संत महापुरूषों के दिव्य दर्शनों का लाभ प्राप्त हो रहा है। पेशवाई के दौरान म.म. स्वामी सुरेंद्रगिरी, म.म. साध्वी प्रेमलता गिरी, साधवी कल्याणी पुरी, स्वामी आनन्द गिरी, स्वामी गजानंद गिरी, श्रीमहंत सागरानंद सरस्वती, श्रीमहंत गिरिजानंद सरस्वती, श्रीमहंत भैरागिरी, महंत कालूगिरी, महंत शंकरानंद सरस्वती, स्वामी आनंद गिरी, श्रीमहंत ओंकार गिरी, श्रीमहंत दिनेश गिरी, महंत नरेश गिरी, महंत नीलकंठ गिरी, महंत राधे गिरी, श्रीमहंत महंत लखन गिरी, स्वामी आलोक गिरी, स्वामी सत्यानंद गिरी, महंत मनीष भारती, स्वामी नत्थीनंद गिरी, आचार्य मनीष जोशी, दिगंबर बलबीर पुरी, दिगंबर राजपुरी, स्वामी रघुवन, स्वामी मधुरवन, स्वामी रविवन, स्वामी नीरज गिरी आदि सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष शामिल रहे। जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री, निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत जसविन्दर सिंह, महंत देवेंद्र सिंह, मुखिया महंत भगतराममहंत जगतार मुनि, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्रपुरी, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी चिदविलासानंद, महंत दामोदर दास, महंत निर्मल दास, महंत रूपेंद्र प्रकाश, म.म.स्वामी कपिल मुनि, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत अमनदीप सिंह सहित पूरे संत समाज ने पेशवाई का स्वागत किया।

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