योग हमारे भारतीय संस्कृति की है अमूल्य धरोहर: डाँ सुनील शर्मा, भारत विकास परिषद समर्पण की ओर से ऑनलाइन सभा का आयोजन किया गया

रुड़की । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में भारत विकास परिषद समर्पण रुड़की की ओर से कल और आज दो दिन का एक अनुकरणीय कार्यक्रम किया गया। योग दिवस की पूर्व संध्या पर एक ऑनलाइन सभा का आयोजन हुआ। प्रारम्भ मे शाखा के अध्यक्ष डाँ सुनील शर्मा ने बताया कि वैसे तो योग हमारी प्राचीन संस्कृति का एक हिस्सा है और वैदिक काल के पहले से हमारे देश के लोग योग का महत्व जानते रहे हैं, परंतु समय गुजरने के साथ साथ लोग इसे भूलते जा रहे थे। यह एक ऐसी विधा है जिससे तन, मन और अध्यात्म तीनो को बल मिलता है। उन्होने बताया की किस प्रकार हमारे प्रधान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयासों और यूनाइटेड नेशन सहयोग से 21 जून 2015 से विश्व भर में योग दिवस मनाया जाना शुरू हुआ। डॉ मधुलिका चौधरी जोकि आयुष मंत्रालय की वैलनेस इंस्ट्रक्टर और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की वरिष्ठ योग शिक्षिका होने के साथ-साथ रुड़की शहर की एक वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट भी हैं, ने योग के महत्व को समझाते हुए शरीर के भिन्न भिन्न अंगों के लिए व्यायाम का महत्व समझाया। उन्होंने कुछ सूक्ष्म व्यायाम के आसन भी दिखाएं जो मनुष्य के लिए, हर उम्र में लाभकारी सिद्ध होते हैं। इसके उपरांत अगले अगले वक्ता आरोग्यं अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ अंकुर सक्सेना जो कि हमारी शाखा के सदस्य डॉ अजय सक्सेना और श्रीमती डॉ मधुराका सक्सेना के सुपुत्र ने रीड की हड्डी, गर्दन तथा कमर के लिए कुछ व्यायाम बताएं। उन्होंने कहा कि 50 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों में रीड की हड्डी में स्वाभाविक तौर पर क्षति होनी शुरू हो जाती है। उन्होंने इसके कारण और निवारण के बारे में विस्तार से तथा अत्यंत रोचक तरीके से समझाया और बताया की कौन-कौन सी योगिक क्रियाएं करने से क्षति को कम से कम किया जा सकता है और जीवन को जीने लायक बनाया जाता है। डाँ अंकुर ने बताया कि हमें अपना वजन स्थिर रखने की कोशिश करनी चाहिए तथा भारी चीजों को उठाने से बचना चाहिए। अगर उन्हे उठाना ही पड़े तो पहले घुटनों के बल झुक जाऐं और फिर उठाएं। इसी प्रकार की और भी बहुत सारी जानकारी उन्होंने दी। उनकी प्रस्तुति के उपरांत बहुत सारे सदस्यों की उत्सुकता बढ़ी और प्रश्नों की झड़ी लग गई। किसी ने पूछा कि अचानक उंगलियों में झनझनाहट आने से या अचानक चक्कर आने पर क्या करना चाहिए? क्या यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हैं? डॉ अंकुर ने कहा कि कभी एकबार ऐसा हो जाना कई कारणों पर निर्भर करता है और जरूरी नहीं कि कोई गंभीर बीमारी ही हो। फिर भी इस बात की जांच कर लेनी जरूरी है। वैसे कुछ आसनों के जरिए हम इन पर काबू करने का प्रयास भी कर सकते हैं। डॉक्टर अजय भार्गव, वीणा सिंह, अनीता गुप्ता, मृणालिनी शर्मा, प्रो. रमा भार्गव, डॉ सुनील शर्मा, डॉ राजीव गोयल आदि सदस्यों ने अपनी-अपनी समस्याओं के निदान के विषय में उनसे प्रश्न किए जिनका डाँ अंकुर द्वारा रोचक तरीके से समाधान प्रस्तुत किए गये। आज 21जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कोविड के कारण सब इकट्ठे तो नहीं हो पाए परंतु शाखा के सदस्यों ने अपने अपने घरों पर
रहकर योगासनों का अभ्यास किया और अपनी प्रस्तुति / फोटो के माध्यम से ग्रुप में प्रेषित की। इस प्रकार भारत विकास परिषद समर्पण, रुड़की शाखा ने 2 दिन का योग कार्यक्रम संपन्न किया।

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