यूपी में योगी की तेजी त्रिवेंद्र की ‘सुस्ती’ बन गई

देहरादून। 18 मार्च 2017 में बीजेपी ने यूपी और उत्तराखंड में प्रचंड जीत की होली खेली थी। 70 में से 57 सीटों की भारी जीत और उम्मीदों के साथ रावत ने कुर्सी संभाली थी। संयोग की बात थी कि उसके ही अगले दिन यूपी में उन योगी आदित्यनाथ ने भी में सीएम की कुर्सी संभाली, जो उनके ही गृह जनपद पौड़ी से आते हैं। प्रदेश भले ही अलग थे, लेकिन पहले ही दिन से रावत और योगी के काम की तुलना होती रही और हो रही है। रावत पर निष्क्रिय सीएम का ठप्पा लगाने का एक काम यूपी में योगी की तेजी ने भी किया। गाहे-बगाहे यूपी में योगी की सख्त छवि और हर अच्छे काम की तुलना त्रिवेंद्र सिंह रावत से होती रही और वह अपनी अलग ही छवि में कैद होते रहे। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 18 मार्च 2017 को राज्य के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता संभाली थी। त्रिवेंद्र को अपना चार साल का कार्यकाल पूर्ण होने से नौ दिन पहले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। इसके अलावा त्रिवेंद्र भी उत्तराखंड के उन पूर्व मुख्यमंत्रियों की जमात में शामिल हो गए हैं, जो अपना पांच साल का कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाए।

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