श्रीशिव महापुराण कथा के पांचवें दिन आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने पंचाक्षरी एवं महामृत्युंजय मंत्र की महिमा पर डाला प्रकाश
रुड़की।ज्योतिष गुरुकुलम,नवग्रह पीठ,पुरानी तहसील रुड़की में चल रही श्रीशिव महापुराण कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि “ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र है।यह अत्यंत सरल,पवित्र और प्रभावशाली मंत्र माना गया है।
श्रद्धा एवं नियमितता के साथ पंचाक्षरी मंत्र का जप करने से मन को शांति,आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।भगवान शिव की आराधना में इस मंत्र का विशेष महत्व है तथा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार निरंतर जप और साधना कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र है।सनातन परंपरा में इसे संकट,भय और कष्ट के समय शिव आराधना का विशेष साधन माना गया है।
श्रद्धा और विधिपूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से मानसिक शांति,सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास की अनुभूति होती है।मंत्र साधना के माध्यम से भगवान शिव का स्मरण मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में धैर्य और आध्यात्मिक संबल प्रदान करता है।आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि मंत्रों का जप केवल मनोकामना पूर्ति के लिए ही नहीं,बल्कि मन की शुद्धि,एकाग्रता,सद्भाव और शिव भक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए भी करना चाहिए।भगवान शिव की भक्ति में श्रद्धा,संयम और निरंतरता का विशेष महत्व है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से शिव मंत्रों का जप किया और भगवान शिव की आराधना की।ज्योतिष गुरुकुलम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर शिव महिमा का श्रवण कर रहे हैं।





























