आईआईटी रुड़की ने डॉक्टोरल शोध पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से भारत की बदलती शिक्षा व्यवस्था को प्रस्तुत किया

रुड़की। डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण के माध्यम से डॉक्टोरल शोध को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने “Experiential Education: Learning from Transformative Schools in India” शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की है। संस्थान के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत के नेतृत्व में प्रस्तुत इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण आईआईटी रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग की शोधार्थी सुश्री पारिसा एपलगार्थ ने अपने पीएचडी शोध के अंतर्गत, प्रो. अन्दलिब तारिक और प्रो. विनय शर्मा के मार्गदर्शन में किया है। लगभग 25 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री का प्रीमियर आईआईटी रुड़की में हुआ। इसे दूरदर्शन पर राष्ट्रीय प्रसारण के लिए भी चयनित किया गया है, जिसका प्रसारण बाल दिवस के अवसर पर 14 नवंबर 2026 को संभावित रूप से निर्धारित है।

भारत के विभिन्न विद्यालयों, गुरुकुलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किए गए क्षेत्रीय अध्ययन पर आधारित यह फिल्म व्यावहारिक सहभागिता, जिज्ञासा, मार्गदर्शन और मूल्यों के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम की प्रक्रिया को प्रस्तुत करती है। इसमें भारत की पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के समग्र विकास संबंधी सिद्धांतों और समकालीन शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह दर्शाती है कि अनुभव और सक्रिय सहभागिता पर आधारित शिक्षा किस प्रकार देश के बदलते शैक्षिक परिदृश्य में योगदान दे सकती है।

प्रो. अन्दलिब तारिक, आईआईटी रुड़की ने कहा, “यह डॉक्यूमेंट्री अनुभवात्मक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चाओं तक सीमित न रखते हुए, इसके व्यावहारिक स्वरूप और संभावनाओं को सामने लाने का एक प्रयास है। भारत के विभिन्न शैक्षिक परिवेशों में किए गए व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन के माध्यम से यह शोध दर्शाता है कि अनुभव, जिज्ञासा, मार्गदर्शन और मूल्यों पर आधारित अधिगम की प्रक्रिया समकालीन शैक्षिक पद्धतियों को किस प्रकार दिशा दे सकती है।”

डॉक्यूमेंट्री की शोध यात्रा और इसके निर्माण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए, सुश्री पारिसा एपलगार्थ, शोधार्थी एवं डॉक्यूमेंट्री की निर्माता, ने कहा, “इन विद्यालयों में मैंने बच्चों को निर्माण करते, प्रश्न पूछते, अपने परिवेश के प्रति संवेदनशील रहते और स्वयं अपनी सीखने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेते देखा। मैं अपने इन अनुभवों को ऐसे माध्यम से साझा करना चाहती थी, जो अकादमिक शोधपत्रों से आगे जाकर अधिक से अधिक शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुँचे और उन्हें यह समझने का अवसर दे कि शिक्षा के क्षेत्र में क्या-क्या संभव है।

डॉक्यूमेंट्री प्रीमियर का एक प्रमुख आकर्षण “भारत में अनुभवात्मक शिक्षा का भविष्य” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। इसमें डॉ. भानु दुग्गल, कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, देहरादून; प्रो. आनंद श्रीवास्तव, कुलपति, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी), दिल्ली; तथा श्री मौलिक भगत, प्रबंध निदेशक, नेसेंट इन्फो टेक्नोलॉजीज एवं NAMTECH और अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी के बोर्ड सदस्य ने भाग लिया। चर्चा में व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा में अनुभवात्मक अधिगम की प्रासंगिकता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अंतर्गत अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने की संभावनाओं तथा समकालीन शिक्षण पद्धतियों को आकार देने में खोज-आधारित दृष्टिकोण, व्यावहारिक सहभागिता और समग्र विकास की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा जगत और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित लगभग 175 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

प्रो. विनय शर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, प्रबंधन अध्ययन विभाग, आईआईटी रुड़की, ने कहा, “अनुभव से अनुभूति, और अनुभूति से जीविकोपार्जन से जीवन – यही अनुभवात्मक अधिगम का सार है। वर्तमान युग में अनुभवात्मक अधिगम केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका बनना चाहिए। भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित प्राचीन ज्ञान, विशेषकर गुरुकुल शिक्षा परंपरा, इस जीवन पद्धति की दिशा में एक सार्थक मार्ग प्रदान करती है। यह डॉक्टोरल शोध इसी मार्ग की पड़ताल करता है और शिक्षा के प्रति अधिक समग्र दृष्टिकोण विकसित करने में अनुभवात्मक अधिगम की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।”

यह डॉक्यूमेंट्री आईआईटी रुड़की के मैकेनिकल एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की अनुभवात्मक अधिगम पहल का हिस्सा है, जिसे एनटीपीसी लिमिटेड का सहयोग प्राप्त है। यह संस्थान की अंतर्विषयी शोध को अकादमिक दायरे से आगे ले जाकर व्यापक जनसमुदाय से जोड़ने तथा देश में शिक्षा के परिवर्तन से जुड़े विमर्श को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दूरदर्शन पर इसके आगामी प्रसारण से मुख्यधारा की शिक्षा में अनुभवात्मक अधिगम की प्रासंगिकता को और व्यापक राष्ट्रीय मंच मिलने की उम्मीद है।

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