जाट महासभा पंचपुरी हरिद्वार द्वारा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर वैदिक यज्ञ कर पुष्पांजलि अर्पित की

हरिद्वार। जाट महासभा पंचपुरी, हरिद्वार द्वारा भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी (पूर्व प्रधान मंत्री, भारत सरकार) के 39 वी पुण्यतिथि पर आर्य समाज से० एक भेल में वैदिक यज्ञ कर पुष्पांजलि अर्पित कर मनाई गई जिसके पुरोहित आचार्य योगेन्द्र मेधावी जी रहे तथा संचालन चौधरी देवपाल सिंह राठी ने किया।

जाट महासभा पंचपुरी, हरिद्वार द्वारा भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी ( पूर्व प्रधान मंत्री -भारत सरकार) की 39 वी पुण्यतिथि आर्य समाज से० एक भेल में वैदिक यज्ञ कर मनाई गई।
यज्ञ की पूर्ण आहुति के बाद गोष्ठी रखी गई।
गोष्ठी में बोलते हुए चौधरी देवपाल सिंह राठी ( अंतरिम अध्यक्ष) ने कहा
चौधरी चरण सिंह का राजनीतिक जीवन भारतीय किसानों और ग्रामीण समाज के उत्थान के लिए संघर्ष का पर्याय रहा है। वे देश के पांचवें प्रधानमंत्री और ‘किसानों के मसीहा’ के रूप में जाने जाने जाते हैं ,चरण सिंह का सफर एक स्वतंत्रता सेनानी से शुरू होकर शीर्ष प्रशासनिक और राजनैतिक पदों तक पहुँचा।

उन्होंने विधायक के रूप में शुरुआत करते हुए 1937 में पहली बार उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) विधान सभा चुनाव जीता और छपरौली से विधायक बने।
राठी जी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में अहम भूमिका निभाई। 1954 में वे संपूर्णानंद के मंत्रिमंडल में राजस्व एवं कृषि मंत्री बने।
उन्होंने कृषि और भूमि सुधार के कारण उपजे मतभेद के चलते 1967 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। इसके बाद वे पहली बार गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकार के तहत 1967-1968 तक राज्य के मुख्यमंत्री बने।
आचार्य योगेंद्र जी कहा कि चौधरी चरण सिंह जी ने
भारतीय क्रांति दल (BKD) का गठन कर अपनी खुद की पार्टी ‘भारतीय क्रांति दल’ बनाई और 1970 में दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
उन्होंने विपक्ष की आवाज उठाई और 1970 के दशक में, वह इंदिरा गांधी की नीतियों के प्रखर आलोचक बन गए।
1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भेज दिया गया।
आचार्य जी ने कहा कि 1977 में आपातकाल के बाद हुए चुनावों में उनकी पार्टी (जो भारतीय लोक दल के रूप में जनता पार्टी में शामिल हो गई थी) ने भारी जीत हासिल की। उन्होंने केंद्र में गृह मंत्री और बाद में उप प्रधानमंत्री के बाद देश के पांचवे प्रधान मंत्री बने।
संजीव चौधरी (बी जे पी के जिला महामंत्री) ने कहा कि जुलाई 1979 में राजनीतिक उठापटक के दौरान, समाजवादी दलों के सहयोग से चौधरी चरण सिंह भारत के पांचवें प्रधानमंत्री बने। हालाँकि, समर्थन वापस लिए जाने के कारण वे कुछ ही महीने (जनवरी 1980 तक) इस पद पर रहे।
उनका पूरा राजनीतिक जीवन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ‘किसान-कमेरा’ वर्ग के सशक्तिकरण को समर्पित था। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी ने कृषि, भूमि सुधार और ग्रामीण विकास पर कई किताबें और पर्चे लिखे। उनकी नीतियों का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की असमानता को चुनौती देना था।
चौधरी चरण सिंह की विचारधारा, सादगी और उनके राजनैतिक संघर्षों की एक लंबी फरिस्त है ।
जून 1951 में उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया एवं न्याय तथा सूचना विभागों का प्रभार दिया गया। बाद में 1954 में वे डॉ. सम्पूर्णानन्द के साथ रहे।
शक्ति वर्धन ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी एक स्वतंत्रता सेनानी, किसान नेता के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ देश के प्रधान मंत्री रहे।
वे पक्के आर्य समाजी और वैदिक संस्कृति के पोषक रहे। हमे अपने बच्चों को आर्य समाज से जोड़ना चाहिए जिससे बच्चों में वैदिक संस्कृति का पोषण हो सके जिससे उनका बौद्धिक विकाश भी होगा।
अन्त में शान्ति पाठ के साथ गोष्ठी का समापन किया गया तथा बाद में सभा उपस्थि सभी ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की तथा सूक्ष्म जल – पान किया।
कार्यक्रम का संचालन चौधरी देवपाल सिंह राठी जी ने किया।
कार्यक्रम में चौधरी देवपाल सिंह राठी, योगेन्द्र पाल राणा, काली चरण वर्मा नरेंद्र सिंह, रकम सिंह, निरंकार सिंह, सिकंदर सिंह, रामचंद्र जाट, यशपाल सिंह, सीता राम, बसंत कुमार पुनिया, उदयवीर बालियान, पवन कुमार, भारत भूषण, देवेन्द्र कुंडू, देवेन्द्र कुमार, नौ बाहर, राजीव चौधरी, रणवीर सिंह, अशोक हुड्डा, राजवीर सिंह पंवार, मनवीर सिंह सिरोही, सुशील चौधरी, हरवीर सिंह बालियान, कृष्ण कुमार पुनिया, के पी सिंह, नरेन्द्र देशवाल, महक सिंह पंवार, अनिल राणा, शक्ति सिंह, वासन सिंह, हरपाल सिंह, बिजेंद्र कुमार, तरुण राठी, संजीव चौधरी, सत्येंद्र चौधरी, गुरविंदर सिंह, शक्ति वर्धन, हरि सिंह, डा० संजील कुमार आर्य, डा० सुशील कुमार आर्य, सुखपाल सिंह पंवार, आशु चौधरी, रविन्दर आर्य, सुनील तोमर आदि उपस्थित रहे।

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