मेरा बाजु रंगा रंग बिचरी रंगा लेदी मोला, अशोकनगर में गढ़वाली होली की धूम, खूब उड़े रंग गुलाल

रुड़की । अशोक नगर की महिलाओं द्वारा भगवान की पूजा कर पर्वतीय होली का आयोजन पूजन के पश्चात प्रारंभ किया गया। श्रीमती सिद्धि बिष्ट के निवास स्थान पर खेली। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश नेगी ने बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में होली का त्योहार बड़े ही अलग अंदाज में मनाया जाता है यहां त्यौहार फाग से करीब 10 दिन पूर्व शुरू होकर लगातार होली तक चलता रहता है इसमें पुरुष और महिलाएं टोली बनाकर परंपरागत बाछय यंत्रों यंत्रों व ढोलक की थाप पर घर-घर जाकर गीत व नृत्य करते हैं । पर्वतीय होली में महिलाओं ने होली गीत गाए गढ़वाली गीतों में। खेलो नंद जौं लाल सुंदर श्माया मुरारी,व रामाजी खेले गढ़वाली ढोला।। आग्ये बसंत सभी वन फुल्ये, वयैलू भी फूल्ये पइंया भी फूल्ये,तिलु कु तेल कपास की वती एक लाख पुत्र सवा लाख नाती, हम होली वाले देवै आशीष, जो हमको दयालु होली कुलानंद वैथेक दयालु श्री भगवान। एक दूसरे को रंग लगाकर तथा गीत और गले मिलकर एक एक दूसरे से गले मिलकर रंग लगाकर मनाया और पकवान बनाकर आपस में बांट कर खाना। समाज को एकता के सूत्र में पिरोता है। सब को होली की शुभकामनाएं इस अवसर पर गढ़वाली मंडली में सतीश नेगी ,सिद्धि बिष्ट , सरोज पंत,हीरा बिष्ट ,संतोषी बिष्ट, सुनीता बिष्ट, अनीता काला, मधुलिका रावत, सरोज नेगी, सरोज डिमरी, बीना नेगी, देवंती भट्ट ,लीला रावत ,सीतांबरी देवी नेगी ,संपत्ति पवार, सोमा रावत, अर्चना बर्थवाल ,महेश्वरी नेगी, सरोज बर्थवाल आदि लोग होली मिलन की शोभा बढ़ा रहे हैं।

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