मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर श्रद्धा और आस्था की पावन डुबकी लगाई, स्नान और गंगा पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने दान किया

हरिद्वार । धर्मनगरी हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु तड़के से ही पहुंचने शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर श्रद्धा और आस्था की पावन डुबकी लगाई। घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। स्नान और गंगा पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने दान किया। मान्यता है माघ महीने की अमावस्या पर गंगा स्नान करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कोविड के खतरे के बीच जिला प्रशासन ने जांच केंद्र बनाए हैं। श्रद्धालुओं की थर्मल जांच के साथ रैंडम सैम्पल लिए जा रहे हैं। हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की कड़ी निगरानी है। सिल्ट आने से गंगा का पानी काफी मटमैला है, बावजूद इसके श्रद्धालु आस्था के साथ स्नान कर रहे हैं। मौनी अमावस्या ध्यान, तप, साधना और आस्था का सबसे बड़ा पर्व है। मौन व्रत कर साधना करने वाला ही मुनि बनता है। मौन से की गई साधना में मनका फेरना और होठों के जाप करना ज्यादा पुण्यदायी एवं प्रभावकारी माना गया है। अमावस्या पतिव्रता स्त्रियों के लिए है महत्वपूर्ण है। आस्थावान महिलाएं गंगा में स्नान कर पीपल के वृक्ष पर धागा लपेटकर 108 परिक्रमा करती हैं। वहीं, दान इत्यादि कर फिर व्रत खोलती हैं। तपस्वी प्रात: काल से ही नित्य कर्म कर मौन साधना में लीन होकर ईष्ट के ध्यान में लीन हो जाते हैं। पूर्ण कुंभ 2021 में पड़ने वाले मौनी अमावस्या की विशेषता और बढ़ गई है। आज होने वाले मौनी अमावस्या स्नान के लिए बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाने और पोर्टल पर पंजीकरण की बाध्यता प्रशासन ने खत्म कर दी है। अब राज्य की सीमा पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की रैंडम सैंपलिंग हा रही है।

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