जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर जोड़-तोड़ चरम पर, 16 दिसंबर को होगा मतदान और परिणाम भी इसी दिन

हरिद्वार । जिला पंचायत अध्यक्ष हरिद्वार के उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है । जिसके चलते जोड़-तोड़ चरम पर पहुंच गई है। दोनों खेमों में समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। करीब 20 जिला पंचायत सदस्य भूमिगत हो गए हैं। वह ढूंढे से भी नहीं मिल पा रहे हैं ।जबकि 15 जिला पंचायत सदस्य दोनों ही खेमों के संपर्क में हैं। 46 जिला पंचायत सदस्य है। वैसे एक-दो जिला पंचायत सदस्य की सदस्यता भी इस बीच समाप्त हो सकती है। क्योंकि उनके संबंध में कार्रवाई शासन स्तर पर विचाराधीन है। हालांकि अचानक घोषित हुए चुनावी कार्यक्रम से चौधरी राजेंद्र सिंह खेमे में अफरा तफरी का माहौल है। क्योंकि चौधरी खेमा भी कोटवाल आलमपुर जिला पंचायत सदस्य की उप चुनाव की तैयारियों में लगा है। इस खेमे को इस बात का दूर तक भी आभास नहीं था कि कोटवाल आलमपुर जिला पंचायत सदस्य सीट के उपचुनाव होने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव कार्यक्रम घोषित हो जाएगा ।चौधरी खेमे का मानना था कि कोटवाल आलमपुर जिला पंचायत सदस्य सीट का उपचुनाव होने के बाद ही जिला पंचायत अध्यक्ष हरिद्वार का उप चुनाव होगा। इसीलिए चौधरी खेमा पूरे जोर कोटवाल सीट जीतने पर लगाए हुए था । लेकिन अचानक जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। जिससे कि इस खेमे में हड़बड़ाहट है। यह खेमा समझ नहीं पा रहा है कि कोटवाल की सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ा जाए या फिर जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव को लेकर मजबूती से मैदान में आया जाए। हालांकि चौधरी खेमा चुनाव लड़ने का शौकीन है। इसीलिए माना जा रहा है कि कोटवाल सीट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव में भी यह खेमा अपना प्रत्याशी उतारेगा। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। वहीं चौधरी सुभाष वर्मा खेमे ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए पूरी ताकत लगा दी है। वर्मा खेमा लगातार सदस्यों की संख्या बढ़ा रहा है ।बहुत सारे सदस्य इस खेमे के संपर्क में हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि वर्मा खेमे ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर कराकर चौधरी खेमे पर बड़ा दांव चल दिया है ।इस दांव की काट फिलहाल चौधरी खेमे पर नहीं हैं। क्योंकि अचानक कार्यक्रम घोषित होने से चौधरी खेमे को प्रत्याशी का चयन करने में ही बड़ी ही दिक्कतें आएंगी। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव बड़े ही संसाधनों का चुनाव है और इसमें जीत हार के समीकरण कोई एक-दो दिन में नहीं बनते। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब कोतवाल जिला पंचायत सीट से जीतने वाला सदस्य मात्र आगे चलकर बोर्ड की बैठक में ही बैठ पाएगा। वह अध्यक्ष चुनाव में भाग नहीं ले पाएगा। क्योंकि कोटवाल आलमपुर सीट पर मतदान 19 दिसंबर को है। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष हरिद्वार का चुनाव 16 दिसंबर को होना है। माना जा रहा है कि इसी लिए वर्मा खेमे का अधिक जोर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव पर है ना कि कोटवाल जिला पंचायत सदस्य सीट के उपचुनाव पर। हालांकि टीम वहां के लिए भी उतारी गई है।

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