बुराइयों से दूर कर सही मार्ग दिखाती है भागवत कथा: आचार्य रजनीश

रुड़की । श्रीमद् भागवत महापुराण विद्या का भंडार है। भागवत कथा मृत्यु के भय को टालती है। मानव जीवन काल में भागवत श्रवण जरूरी है। ये सुवचन बोल आशीर्वाद एंक्लेव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य पंडित रजनीश शास्त्री ने कहे। उन्होंने कहा कि धर्म के पुजारी ही धर्म चाहते हैं। भागवत महापुराण हैं साथ ही विद्या की भंडार है। ईश्वर का भजन व कीर्तन को स्मरण कर चितन करें। अपने जीवन काल में भागवत श्रवण का रसपान करें। जीवन में पांच कर्ज होते हैं। हर इंसान को अपने पिता को भागवत कथा जरूर सुनाना चाहिए। भागवत कथा श्रवण से सुख शांति मिलती हैं साथ ही पाप नष्ट होते हैं। पीड़ा से मुक्ति मिलती है। लौकिक व परलौकिक सिद्धता प्राप्त होती है। कथा श्रवण से जीवों का कल्याण होता है। कथा पुरानी नहीं होती है। आचार्य पंडित रजनीश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से मोक्ष की प्राप्त होती है। भगवान की महिमा अपरंपार है। लोग जिस रूप से भगवान का सुमिरन करते हैं भागवान उन्हें उसी रूप में मिल जाते है। भक्तों के इच्छे से भगवान पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। भागवत कथा सुनने से सद्गति मिलती है। एक दूसरे में बंधुत्व की भावना बढ़ती है। मनुष्यों के आचरण में अपेक्षित सुधार होता है। भगवान श्री कृष्ण के नाम लेने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है। लोग ज्ञान विज्ञान की उंची उड़ान भड़ लिए हैं मगर संसार में आने का करण नहीं जान पाए है। अपने अस्तित्व और वजूद को जानने के लिए भगवान श्री कृष्ण जो रास्ता गीता में बताए हैं। यही सत्य है। सत्य के बोध के लिए पाठ होता है। कथावाचक आचार्य पंडित रजनीश शास्त्री ने कहा कि जो व्यक्ति सत्संग व भगवत कथा में मौजूद रहते है, उन पर भगवान सदैव प्रसन्न रहते है। जीवन में सुख तो सभी चाहते है, लेकिन अपने जीवन को आध्यात्म की ओर ले जाने का समय नहीं दे पाते है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए मनुष्य को बुराइयों से दूर रहना पड़ेगा। जब मनुष्य बुराइयों से दूर होगा तो अपने आप ही सफलता मिलेगी। भागवत कथा भी मनुष्य को बुराइयों से दूर कर सही मार्ग दिखाती है। भागवत कथा ज्ञान का भंडार है जो मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। यदि मनुष्य के अंदर बुराई है तो लाख कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिलती है। सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर की बुराई को खत्म करना चाहिए। कथावाचक ने कहा है कि भगवत कथा का श्रवण करने से भक्त को भगवान का एक आलौकिक आशीर्वाद प्राप्त होता है। हमें नियमित रूप से कथा, कीर्तन एवं सत्संग में जाना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने संवारा आओ तो सरी, माधो रा मीरा मंदिर में एकली खड़ी…., अमृत नाम है हरि जगत में… व भज मन नारायण नारायण… जैसे संगीतमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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