व्यवसायी नेताओं के आने से राजनीति का ट्रेंड बदला, चंदे से चुनाव लड़ने की राजनीति अब व्यवसायियों की गिरफ्त में आ गई

सुभाष सैनी, रुड़की । उत्तर प्रदेश से हरिद्वार जनपद के उत्तराखंड राज्य में शामिल होने के बाद जनपद के भाजपा, कांग्रेस से जुड़े तमाम स्थापित छोटे बड़े नेताओं की राजनीति को ऐसा ग्रहण लगा कि वे धराशायी होते चले गए और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े नये लोग स्वयं या फिर उनके सहारे नेता राजनीति में छा गए।आज 20 वर्ष में नये कारोबारी, व्यवसायी नेताओं ने राजनीति का पूरा ट्रेंड ही बदल दिया।चन्दें के पैसे से चुनाव लड़ी जाने वाली राजनीति अब व्यवसायियों की गिरफ्त में आ गई। 25 वर्ष पूर्व रुड़की में जैसे स्थापित नेताओं में कांग्रेस से पूर्व मंत्री रामसिंह सैनी जी थे और भाजपा से पूर्व मंत्री डॉ पृथ्वी सिंह विकसित। ऐसे ही युवा कांग्रेस में दिनेश कौशिक जी तथा भाजयुमो जिला अध्यक्ष थे अश्वनी कौशिक जी। साफ-सुथरी राजनीति करने वाले दोनों ही कौशिक उस समय रुड़की में प्रेम मंदिर वाली रोड पर अश्वनी जी भाजपा नेता प्रमोद गोयल जी के यहां किराए पर तथा दिनेश जी इसी रोड पर सामने वाली गली में अपने आवास में रहा करते थे। दोनों ही धनाढ्य नहीं थे । दोनों ने ही अपनी-अपनी पार्टियों से रुड़की चेयरमैन पद का चुनाव लड़ा जिसमें दिनेश जी तो जनधन के बल पर वर्ष 2003 में पार्टी से बगावत कर निर्दलीय तौर पर रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए लेकिन वर्ष 2008 में दोनों ही कौशिक अपनी अपनी पार्टियों से प्रत्याशी होते हुए रुड़की के प्रसिद्ध मिष्ठान व्यवसायी युवा कारोबारी निर्दलीय प्रत्याशी प्रदीप बत्रा जी से चुनाव हार गए। हालांकि वर्ष 2002 में भाजपा ने रुड़की के धनाढ्य सुरेश चंद जैन जी को विधायक जितवा कर रुड़की की राजनीति में कारोबारियों का महत्व बढ़ा दिया था। जिसका खामियाजा अश्वनी कौशिक जी को कारोबारी बत्रा जी के हाथों पराजित होकर भुगतना पड़ा । अब रुड़की में चुनावी लड़ाई में आदमी का महत्व कम, पैसे का महत्व ज्यादा हो गया, जो अभी भी जारी है । आज भाई अश्वनी कोशिक जी हमारे बीच नहीं है ,हम उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। अजीब संयोग है कि ठीक इसी प्रकार उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड राज्य में आए हरिद्वार जनपद के दो दिग्गज नेता पूर्व मंत्री डॉ पृथ्वी सिंह विकसित जी व पूर्व मंत्री रामसिंह सैनी जी के साथ भी हुआ हालांकि पूर्व मंत्री रामसिंह सैनी जी जो रुड़की से विधायक बनकर उत्तराखंड राज्य में आए थे उन्हें रुड़की सीट से ही चुनाव लड़ना था लेकिन जब सैनी समाज की लीडरशिप के उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार से आगे बढ़ने का टर्निंग प्वाइंट था तो श्री सैनी रुड़की सीट छोड़कर भाजपा के दिग्गज नेता अपने स्वजातीय प्रतिद्वंद्वी पूर्व मंत्री डॉ पृथ्वी सिंह विकसित के मुकाबले बहादराबाद विधानसभा सीट से भिड़ गए जहां उन्होंने अपनी तो जमानत जब्त कराई ,साथ ही डॉ विकसित जी भी दूध के प्रमुख व्यवसायी बसपा के तत्कालीन प्रत्याशी हाजी शहजाद से मामूली अंतर से चुनाव हार गए । श्री सैनी की अति महत्वाकांक्षा व इस राजनीतिक चूक का दंश उत्तराखंड राज्य में सैनी समाज आज तक झेल रहा है। सैनी समाज का कोई भी, किसी भी पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधानसभा तक नहीं पहुंच सका । काश! श्री सैनी वर्ष 2002 का चुनाव रुड़की लड़े होते तो शायद यह दंश सैनी समाज को ना झेलना पड़ता । जैसा कहा भी है कि तेरी छोटी सी एक भूल ने सारा गुलशन जला दिया । हालांकि श्री सैनी ने रुड़की सीट पर वर्ष 2007 में बसपा से, वर्ष 2012 में लक्सर सीट पर कांग्रेस से विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन वहां भी दोनों बार जमानत ही जब्त हुई । चुंकि अब राजनीति का ट्रेंड पूरी तरह व्यवसायिक हो चुका है। पूर्व मंत्री विकसित जी ने 2007 का चुनाव हारने के बाद चुनावी राजनीति से सन्यास लेने की सार्वजनिक घोषणा करके मिसाल कायम की थी । वह आज हमारे बीच नहीं है। उनकी बड़ी सोच, आदर्श समाज सेवा में हमें प्रेरणा देते रहेंगे। दिनेश कौशिक जी, पूर्व मंत्री रामसिंह सैनी जी अभी कांग्रेस में हैं और सक्रिय हैं। हम इनकी दीर्घायु की कामना करते हैं।

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