राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम के सामने आपदा मित्र और एसडीआरफ जवानों के द्वारा बाढ़ की स्थिति में खोज एवं बचाव कार्यो का प्रदर्शन किया, मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

हरिद्वार । सोमवार को भारत सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम के सामने हाथी पुल गउ घाट पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हरिद्वार के आपदा मित्र और एसडीआरफ जवानों के द्वारा बाढ़ की स्थिति में खोज एवं बचाव कार्यो का प्रदर्शन किया गया।एनडीएमए के सदस्य श्री राजेंद्र सिंह, श्री रमेश कुमार जी संयुक्त सचिव एनडीएमए, जिलाधिकारी श्री सी रविशंकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री सेंथिल अबुदई, श्री नवल प्रकाश संयुक्त सलाहाकार एनडीएमए, श्री अभिषेक शांडिल्य एवं श्रीमती तनुश्री वर्मा कंसल्टंट, श्री शीरीष कुमार गौतम सेक्शन आफिसर , श्री बृजेश जैसवाल प्रोजेक्ट एसोसिएट आपदा (मित्र योजना) के सामने अलग-अलग गंावों मे बनायी गयी आपदा मित्र टीम के स्वंय सेवियों द्वारा पानी में डूबने के पीड़ित व्यक्ति की स्थिति और आपदा मित्र द्वारा किए जाने वाले प्रथम दायित्वों को प्रदर्शन किया गया। गंगा में बह रहे व्यक्ति को बचाने के लिए टीम द्वारा पहला प्रदर्शन बिना बोट की सहायता और दूसरा प्रदर्शन बोट की सहायता से डूबते हुए को बचाने के लिए किया गया। प्रशिक्षित आपदा मित्रों और एसडीआरफ जवानों के द्वारा डूबती हुई अवस्था में मदद को चिल्ला रहे व्यक्ति की ओर रस्सी और ट्यूब फेंका गया टीम के कुछ तैराक जीवन रक्षक जैकेट के साथ पानी में उतर कर डूबते व्यक्ति को बचाते हुए बाहर निकाल कर लाये। सिटी जल पुलिस और एम्बुलेंस को फोन किया गया ताकि दोनों समय रहते मौके पर पहुंच सकें। बाहर निकले व्यक्ति ने आवाज देने पर कोई जवाब नहीं दिया। बेहोशी की हालात में होने के चलते मुह से आक्सीजन देने का प्रयास किया। होश में न आने पर स्ट्रेचर की मदद से एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया। इस प्रकार दूसरे प्रदर्शन में बाहर निकाला गया व्यक्ति होश में था और उसने अपने हाथ और पैर में कुछ चोट लग जाने की बात बोली। आपदा मित्र टीम द्वारा सबसे पहले घायल के पैर में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्राथमिक उपचार दिया। उन्होंने उपलब्ध गमछे की मदद से पट्टी बांधते हुए बांस की खप्पचियां बांधी और कंधे में प्लास्टर नूमा त्रिकोणीय पट्टी कपड़े से बांध दी, जिससे उठाते और एंबुलेंस तक पहुंचाने में घायल को अधिक चोट न पहुंचे। इस अवसर रह प्राधिकरण के सदस्य नरेंद्र सिंह ने बचाव टीम के कार्यो की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उसका प्रस्तुतिकरण सही प्रकार से करना ये हरिद्वार के आपदा मित्रों ने बहुत सुंदर ढंग से किया है। एसडीआरएफ और आपदा मित्रों का समन्वय भी हरिद्वार में बेहतर है। उन्होंने कहा कि दोनों टीमों द्वारा आज आपदा मित्र टीम योजना का उत्कृष्ट नमूना दिखाया गया है। उन्होंने डीएम और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा की कि यह डेमो हर पंद्रह या तीस दिन के अंतराल पर नियमित कराया जाये तो टीमों में और अधिक क्षमतायें बढेंगी। जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन की सर्वोच्च संस्था के समक्ष आपदा मित्रों के बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता जतायी। उन्होंने कहा कि डूबने की घटनाओं पर हरिद्वार में आपदा मित्र काफी सराहनीय कार्य करते हैं। एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्र ये संयुक्त टीम डूबने सम्बंधि घटनाओं से रेस्क्यू करने की मजबूत सिस्टम है और इसको और अधिक सशक्त बनाने के लिए एनडीएमए की फेज 02 योजना लागू किये जाने की घोषणा से यह सभी स्थानों पर और अधिक मजबूत होगी। जिलाधिकारी ने डामकोठी में प्रजेंटेशन के माध्यम से प्राधिकरण अधिकारियों के समक्ष आपदा और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिले में स्थापित प्रक्रिया को विस्तार से बताया। जिसमें जिले में आपदा की स्थ्तिि में अर्ली वाॅर्निंग सिस्टम, आपदा मित्र योजना की संरचना, उद्देश्यक, आपदा मित्र चयन प्रक्रिया, 12 दिवसी प्रशिक्षण, एमरजेंसी रिस्पाॅंस किट, बाढ़ चैकियों में आपदा मित्रों का योगदान, बाढ़ की स्थिति में प्रभावितों को रखने के लिए चिन्हित सुरक्षित स्थल, महिला एवं युवक मंगल का योगदान एवं प्रक्षिक्षण, कांवड़ मेले के दौरान आपदा मित्रों की भूमिका आदि पर विस्तार से चर्चा की।

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