उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति की केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित, चिन्हीकरण से छूटे हुए हैं उनको चिन्हित करने पर रणनीति बनाई गई
रुड़की । उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति की केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक अशोक नगर स्थित एक स्कूल परिसर में आयोजित की गई। बैठक में जो राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण से छूटे हुए हैं उनको चिन्हित करने पर रणनीति बनाई गई। बैठक में सितंबर में ऋषिकेश में राज्य स्तरीय सम्मेलन करने का निर्णय बी लिया गया। इस अवसर पर नारसन से चौधरी भंवर सिंह वर्मा ने कहा कि हमारा आन्दोलन समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला के नेतृत्व में शुरु हुआ। आज भी आन्दोलनकारियों के लिए वे एवं उनकी पूरी टीम संघर्षरत है। हरिद्वार से पहुंचे केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जोशी ने कहा कि अगर आन्दोलनकारियों के बीच से दलाल पैदा न होते तो ऐसी स्थिति नहीं आती। हमने फर्जी आंदोनकारी बनाने पर रोक लगाई। समाचार पत्रों का दुरुपयोग रोका तो आज हमे ही फर्जी कहा जा रहा है। डॉ. अमर सिंह अहतान जो 28 दिन तक 1995 में हरिद्वार में आमरण अनशन पर बैठे। अगर हरिद्वार में आन्दोलन का नेतृत्व किया तो वे चार लोग हर्ष प्रकाश काला, सतीश जोशी, कमला बमोला, जेपी पाण्डे है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भी फर्जीवाड़ा कर आन्दोलनकारियों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे लोगों से हम सभी सच्चे आन्दोलनकारियों को सचेत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के बहकावे में न आए। ऋषिकेश से आए राज्य आंदोलनकारी एवं वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि आज आवश्यकता है सच्चे आन्दोलनकारियों को पहचानने की। हम लोग व्हाटसअप पर गलत एवं भ्रामक प्रचार करने वालों को अगर अपना नेता मानेंगे तो भटकते ही रहेंगे। इसलिए जिन्होंने सच्चाई से आन्दोलन लड़ा उनका साथ दो। साथ ही सितंबर में ऋषिकेश में 13 जनपदों का सम्मेलन करने की घोषणा की। कमला बमोला केन्द्रीय कोषाध्यक्ष ने उन आन्दोलनकारियों को धिक्कारा जो फर्जी आन्दोलनकारियों के पीछे लगकर चिन्हित होने की आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने साफ कहा कि हम भी देखते हैं कि वो कैसे चिन्हित होते हैं। बैठक की अध्यक्षता कर रहे केन्द्रीय अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे द्वारा जिस प्रकार से मांग की गई है, उस पर जिलाधिकारी की संस्तुति से आन्दोलनकारियों की सूची चिन्हीकरण हेतु लंबित है। जो सरकार द्वारा शासनादेश होने पर चिन्हित होंगे। न हम फर्जी करेंगे न करने देंगे। उन्होंने उन फर्जी आन्दोलनकारियों को भी चेताया जो आन्दोलनकारियों को गुमराह एवं भ्रमित कर रहे हैं। अगर उनकी जांच बिठाई गई तो दूध का दूध एवं पानी का पानी हो जाएगा। वर्ष 2014-15 की सूची का जिक्र करते हुए काला ने कहा कि सूची में आन्दोलनकारियों के साथ अन्याय किया गया। जिसके लिए सभी से लड़ाई लड़ने का आह्वाहन किया। परन्तु सब पीछे हट गए। जिसका परिणाम आज तक भुगतान पड़ रहा है। अगर आन्दोलनकारियों के साथ न्याय नहीं हुआ तो वह कोर्ट तक भी जाने को तैयार हैं। बैठक में एक सितम्बर को खटीमा में एवं दो सितम्बर में मसूरी में शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की घोषणा की प्रतीक्षा है अगर इन दोनों दिनों में मुख्यमंत्री घोषणा नहीं करते तो ऋषिकेश में सितम्बर में सम्पूर्ण उत्तराखंड का सम्मेलन कर दो अक्तूबर रामपुर शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने एवं आन्दोलन की कठोर नीति बनाई जाएगी। अन्यथा 3 अक्टूबर से 1994 के जैसे आन्दोलन की नीति पर आन्दोलन किया जाएगा। आन्दोलनकारियों में इतना आक्रोश है कि वे शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री को न घुसने की चेतावनी से भी नहीं चूकेंगे।सभा का संचालन केन्द्रीय महामंत्री प्रेम गोदियाल ने किया। सभा में ऋषिकेश, हरिद्वार एवं रुड़की के राज्य आन्दोलनकारियों ने भाग लिया।


