पर्यावरण की स्वच्छता के लिए गौरैया का संरक्षण जरूरी, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक – 1 रूड़की में गौरैया संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
रुड़की । हर एक पेड़ पौधा, पक्षी, जानवर सभी का इस पर्यावरण को संतुलित और संरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका है | इसी श्रेणी में नाम आता है एक पक्षी गौरैया का, जो पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| गौरैया हमारे घर-आँगन और आस-पास से बड़ी तेजी से विलुप्त हो रही है। लोगो की प्रकृति के साथ किये गये दोहन की वजह से यह हुआ है| इसी के मद्देनज़र केंद्रीय विद्यालय न- 1 रूड़की में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं समाज को जागरूक करने के उद्येश्य से गौरैया संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय था- “गौरैया संरक्षण अभियान – कहाँ गई मेरे आंगन की गौरैया” ।
इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पर्यावरण विद असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉक्टर विनय कुमार सेठी थे| अपने वक्तव्य में डॉक्टर विनय कुमार सेठी ने बताया कि दस हजार पुराना हमारा यह साथी बहुत ख़ामोशी से हमसे दूर हो रहा है, और विलुप्त होने कि कगार पर है । उन्होंने बताया कि गौरैया की जरुरत और पसंद को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लकड़ी का एक छोटा सा घोंसला-घर तैयार किया है जिसको कहीं भी दस से बारह फीट की ऊँचाई पर लगाया जा सकता है, ताकि गौरैया वहां रहकर अपने अंडे दे सके और उनकी संख्या बढाई जा सके जो कि विलुप्त होने की कगार पर है । गौरया को बचाना हमारी प्रकति के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके लिए हमें अपने घरों में छोटा सा बगीचा जरूर बनाना चाहिए और समय-समय पर अपने घरों की छत पर अनाज के दाने और इनके पीने के लिए पानी की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए।
प्राचार्य वी के त्यागी ने अपने संबोधन में बताया कि गौरैया विश्व में लगभग हर जगह पर पाई जाती है, परंतु वर्तमान में ऐसा देखने में आया है कि आज के समय में पेड़ों को हो रही अंधाधुंध कटाई और कीटनाशक पदार्थों के छिड़काव के कारण यह विलुप्त होने के कगार पर है। हमें अपने छोटे-छोटे प्रयासों से इसे विलुप्त होने से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। पक्षी पेड़ों पर ही रहते है अतः हमें हर एक अवसर पर तथा हर एक जगह पर पेड़ – पौधे जरुर लगाने चाहिए । यही एक रास्ता है जिससे हम पर्यावरण तथा उससे सम्बंधित जीव -जंतु तथा पक्षियों को भी संरक्षित कर सकते हैं ।
गौरैया संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपप्राचार्या श्रीमती अंजू सिंह ने बताया कि इंसान का वजूद पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, पक्षियों से गहरे तक जुड़ा हुआ है। ये सब एक-दूसरे के पूरक के रूप में पर्यावरण को संतुलित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। अतः गौरया का संरक्षण हम सबको मिलकर करना चाहिए। कार्यक्रम का सञ्चालन पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमती पूनम कुमारी ने किया| इस अवसर पर कपिल देव, विवेक कौशिक, तथा श्री विपिन भी उपस्थित रहे।



