कांग्रेस के झूठे वादों पर जनता ने लगाया ब्रेक: विकास तिवारी

हरिद्वार । भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी ने कहा कि भाजपा के लिए व्यक्ति से पहले विचार जरूरी है। आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का गौरव भाजपा को इसीलिए हासिल हुआ, क्योकि विचारवान, संस्कारवान और अनुशासित लोग पार्टी से जुड़े। जहाँ तक कांग्रेस मे शामिल जो लोग शामिल हो रहे हैं उनका संबंध भाजपा से नही है। कुछ पार्टी से निष्काषित है तो इसलिए कि वह पार्टी की रीति, नीति और सिद्धांतों पर फिट नही बैठे। पार्टी मे अवसरवाद और पदलोलुपता के लिए कोई स्थान नही है। भाजपा सेवा और जनता के लिए समर्पित है और उसे किसी के दल मे आवाजाही से कोई फर्क नही पड़ता।

तिवारी ने कहा कि ऐसे जिन थोड़े बहुत लोगों को व्यक्तिगत महत्वकांक्षा और राजनैतिक संभावनाएं पार्टी से बड़ी आभासित होने लगती है। उनके भ्रम का शिकार होने की स्थिति बन जाती है।

फिलहाल जो लोग स्वयं के हित में या किसी अपनी कमी के चलते भाजपा छोड़ दूसरी पार्टियों में शामिल हुए हैं उनके प्रति भी संगठन को किसी भी तरह का दुराभाव नहीं है।

ऐसे तमाम लोगों को इस उम्मीद के साथ शुभकामनाएं कि जल्द ही उन्हें अपनी गलती का अहसास भी हो जाएगा।

क्योंकि एक तिनके के सहारे भी समंदर पार करने की उम्मीद रखी जा सकती है, लेकिन डूबते जहाज से नहीं। कांग्रेस डुबता हुआ जहाज़ है ।

आज नेतृत्विहीन, विचार और सिद्धांतहीन कांग्रेस पार्टी वही डूबता जहाज है जो उसमे सवार सभी लोगों की संभावनाओं को लील जाएगा।

कांग्रेस पार्टी का संगठन और नेतृत्व राज्य में शून्य हो गया है। आपसी द्वंद्व और वैमनस्य इतना है कि राज्य के अंदर उनका एकसाथ बैठना भी असंभव सा हो गया है।

आज हालात ये हैं कि उनकी इसी कमजोरी का लाभ अब उनका हाईकमान भी उठाने लगा है।

उनके प्रदेश प्रभारी के लिए देवभूमि आने की कोई अहमियत नहीं है, लिहाजा गाहेबगाहे प्रत्येक बैठक में सबको दिल्ली जाना पड़ता है।

एक बात जो साफ साफ नजर आती है कि जो लोग वहां गए हैं उनको कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा नहीं और केंद्रीय नेतृत्व के लिए आने वालों की कोई अहमियत नहीं। इसीलिए प्रदेश की ज्वाइनिंग भी भी दिल्ली ही करनी पड़ी है।

कांग्रेस पार्टी जिस ज्वाइनिंग पर गलतफहमी पाल रही है वो भाजपा में सप्ताह दर सप्ताह की तस्वीर है।

आज हालत ये है कि कांग्रेस पार्टी के लिए प्रदेश दो तिहाई विधानसभा सीटों पर लड़ने के लिए उम्मीदवार तक नहीं हैं।

लिहाजा उनके लिए जीतना तो दूर की कौड़ी है। सिर्फ नाम के लिए लड़ने वाले संभावित 70 उमीदवार भी उनकी ही शर्तों पर आयातित करने पड़ रहे हैं।

लिहाजा ये जुड़ाव, विचारों सिद्धांतों को आत्मसार करने का गठबंधन नहीं, बल्कि एक दूसरे को धोखा में रखने का ठगबंधन है।
ये सब पूर्व में कांग्रेसी रहे हैं या या किसी ना किसी आरोप में हमारे पार्टी से निकले गए हैं । गौरव गोयल भ्रष्टाचार के आरोप में , भीम लाल आर्य ख़रीद फरोख्त में , नारायण पाल का कोई अस्तित्व नहीं बिन पेंदे का जा है कभी बसपा कभी अन्य दलों में लखन सिंह माफिया है अनुज गुप्ता कांग्रेसी ही है पहले से लगभग सभी कांग्रेस गोत्र के हैं।

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