शिवालिक नगर में पारिजात साहित्यिक मंच की ओर से कवि गोष्ठी आयोजित की गई, कवियों ने कविता के माध्यम से जीवन, समाज, प्रेम, देश और ईश्वर के प्रति अपनी भावनाएं प्रकट कीं
हरिद्वार । पारिजात साहित्यिक मंच की ओर से रविवार शाम शिवालिक नगर में आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने कविता के माध्यम से जीवन, समाज, प्रेम, देश और ईश्वर के प्रति अपनी भावनाएं प्रकट कीं। गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती पूजन और दीप जलाने के साथ हुई। साधुराम पल्लव ने पांव ठहरे हैं, मन सफर में है और चले जब नाव कागज की रचना पेश की।
अरुण कुमार पाठक ने लोग बिछुड़े मगर वो मिले भी तो हैं गीत से ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट की। कंचन प्रभा गौतम ने अपने गीत मैं फूल-सी खिल जाती हूं तुझे देखकर से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। डॉ. अशोक गिरि ने तीर तरकश में ही अच्छे लगते हैं कहकर संयम और सदाचार की बात कही। ‘हरि के द्वारा हरिद्वार में प्रेम का शंकर रहता है’ कह कर आत्म परिचय परोसा। रमेश रमन ने ‘कितने दिन और लगेंगे मित्र तुम्हें समझाने में’, गीतकार भूदत्त शर्मा ने ‘पाँव धरती पर धरो तो धार भी रखना सखे, कंटकों के हृदय में करुणा कभी नहीं होती’ शशिरंजन समदर्शी ने ‘नैसर्गिक सौंदर्य निराला देख अचंभित हो जाता हूँ’ व सोनेश्वर कुमार ‘सोना’ ने ‘बूँद बारिश की जो मेरे तन पर गिरी मां बदन जल उठा आपकी चाह में’ से प्रेमगीतों की वर्षा की।
राजकुमारी राजेश्वरी ने ‘भारत भूमि हो खाली कभी वीरों लड़ाकों से, यही सब सोचकर सैनिक स्वयं का रक्त बोता है’ कह कर देश के शहीदों को याद किया। कवि अरविन्द दुबे ‘जो कुदरत ने हमको दिया वह संभालो, दुआएँ कमा लो दुआएँ कमा लो’ की सीख दी। दिव्यांश ‘दुश्यंत’ ने ‘एक ज़माना आयेगा, कलम चलेगी रस्तों पर और लेखक क़ैद हो जायेगा’ के साथ कवि हृदय का दर्द बयां किया। युवा ओज की कवियित्री वृंदा ‘वाणी’ ने अपने ओजस्वी गीत ‘अब आरम्भ रण का होगा’ के साथ अपनी कविता ‘पिता: एक अनकही कहानी’ प्रस्तुत कर पितृ नमन किया। ‘मालिक तेरे करम ने कितनों को सुर्ख़ रूह कर दिया, तेरा लाख-लाख शुक्रिया, मुझे ग़मों मालोमाल कर दिया’ के साथ लखनऊ से पधारे कन्हैयालाल झींगरन ने ईश्वर का धन्यवाद किया। अपराजिता ‘उन्मुक्त’ ने ‘प्राण का आधार है, जीवन किया साकार है’ कह कर राष्ट्र वंदन किया। ‘मुझे मेरे ही आईने से परहेज है हजारों सवाल है ज़हन में जवाबों का खेद है’ के साथ रवीना राज ने अपनी व्यथा रखी।

