गंगा घाटों को प्लास्टिक मुक्त किया जाए, स्वयं सहायता समूह गंगा स्वच्छता में करें सहयोग
हरिद्वार । आमतौर पर देखा जाता है कि हरिद्वार में आने वाले यात्रियों द्वारा गंगाजल हेतु प्लास्टिक की कैन तथा घाट पर बैठने हेतु प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है व प्लास्टिक का उपयोग भी हरिद्वार शहर में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है । इसी समस्या के निराकरण हेतु नगर आयुक्त दयानन्द सरस्वती की अध्यक्षता में दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ सी0सी0आर0 कार्यालय के सभागार में बैठक आयोजित की गयी, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा गंगा घाटों पर स्टॉल लगाये जाने व प्लास्टिक के कैन के बजाय पर्यावरण के अनुकूल विकल्प जैसे- बांस, तांबा व काँच की बोतल की बिक्री एवं प्लास्टिक के स्थान पर हाथ से निर्मित कपड़े या जूट की चटाई रू 10 प्रति चटाई किराये पर उपलब्ध कराए जाने हेतु निर्णय लिया गया । उक्त कार्य हेतु नगर आयुक्त द्वारा एक सप्ताह के भीतर सभी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सैंपल/प्रस्ताव प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिए गए व जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदन प्राप्त किए जाने के उपरान्त पायलट बेसिस पर मालदीव घाट, कांगरा घाट, रोड़ी बेलवाला, उषा घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट, अमरापुर घाट, शीतला माता एवं निकट सी0सी0आर0 पुल पर 25 अप्रैल 2022 से विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किराए पर हाथ से निर्मित कपड़े अथवा जुट की चटाई उपलब्ध कराए जाने व बांस/तांबे/काँच की बोतलों की बिक्री का कार्य शुरू किया जाएगा। इससे पर्यावरण में प्लास्टिक का प्रदूषण तो कम होगा ही और साथ साथ हरिद्वार की स्थानीय स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आजीविका को भी बढ़ाया जा सकेगा ।
बैठक में नगर आयुक्त के अतिरिक्त अंकित रमोला सिटी मिशन मैनेजर, रजनी बिष्ट, सामुदायिक संगठनकर्ता श्रीमति सोनिया गुप्ता, कु0 शाहीन एवं नगर निगम हरिद्वार में पंजीकृत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित रही ।



