रुड़की के ईदगाह सहित नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अकीदत के साथ अदा की गई ईदुल-अजहा की नमाज, मांगीं अमनों-सलामती व खुशहाली की दुआएं
रुड़की । ईदुल-अजहा का त्यौहार नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अकीदत,भाईचारे, सौहार्दपूर्ण वातावरण एवं शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया।नगर की प्रमुख ईदगाह में ईदुल-अजहा की नमाज मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने अदा कराई,जबकि जामा मस्जिद में कारी मोहम्मद शाबान ने ईदुल-अजहा की नमाज पढ़ाई,इसके अलावा रामपुर ईदगाह सहित नगर व आसपास के क्षेत्रों की मस्जिदों में भी ईदुल-अजहा की नमाज अदा की गई।
इस दौरान अमनों-सलामती,प्यार-मोहब्बत तथा मुल्क की खुशहाली व तरक्की की दुआएं मांगी गई।नगर की ईदगाह में नमाज से पहले मौलाना अजहरुल हक ने ईदुल-अजहा पर विस्तार से प्रकाश डाला।कहा कि कुर्बानी इस्लाम के हिस्से में से एक हिस्सा है,जो नबी हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है।
पैगंबर इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जरिए इस उम्मत में भी प्रत्येक मालदार मुसलमान पर कुर्बानी को वाजिब करार दिया गया है।कुर्बानी अल्लाह की रजा के लिए मुसलमान करता है,इसमें दिखावा नहीं होना चाहिए,वहीं जामा मस्जिद में नमाज से पहले मौलाना अरशद कासमी ने अपने बयान में कहा कि मुसलमान त्याग और बलिदान के इस त्यौहार पर अपनी तमाम बुराइयों का त्याग करें और तकब्बुर,घमंड,अना,चुगली आदि बुराइयों से हटकर इस्लामी सिद्धांतों पर अपनी जिंदगी गुजारे।इस्लाम अपने अनुयायियों को बताता है कि किसी को तकलीफ मत दो,इसलिए दूसरे धर्म के मानने वाले लोगों की आस्था व भावना को भी कोई ठेस न पहुंचे,इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। मदरसा अरब रहमानिया के प्रशासक आदि मोहम्मद मुस्तकीम ने ईदगाह की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा समस्त मुस्लिम समाज को इस पर्व की मुबारकबाद दी।ईदगाह पर रुड़की सीओ ओशिन जोशी व गंगनहर कोतवाली इंस्पेक्टर मणिभूषण श्रीवास्तव ने पूरी मुस्तैदी से सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।इस अवसर पर इंजीनियर मुजीब मलिक,अफजल मंगलौरी,हाजी सलीम खान,जाकिर हुसैन,कलीम खान,शेख अहमद जमा,हाजी लुकमान कुरैशी,उम्मेद गाजी,मकसूद हसन,रियाज कुरैशी,आरिफ नियाजी,मोहम्मद बाशिक,निसार अहमद अंसारी,साकिब कादरी,सैयद नफीसुल हसन,अलीम सिद्दीकी, मुबाशिर एडवोकेट,इमरान देशभक्त,सलमान फरीदी,शेर अली,अनस खान व जान मोहम्मद आदि ने ईद की नमाज अदा की।

