दो साल बाद रोक हटने पर बागड़ यात्रा शुरू, देहात के हरेक गांव से दो-चार श्रद्धालु बागड़ यात्रा पर जा रहे हैं, बढ़ रहा उत्साह
रुड़की । कांवड़ यात्रा की तर्ज पर होने वाली बागड़ यात्रा इस साल हरियाली तीज से फिर शुरू हो गई है। 2020 व 2021 में कोरोना गाइडलाइन के चलते यात्रा पर रोक लगी हुई थी। दो साल बाद रोक हटने पर लोगों में बागड़ यात्रा का उत्साह भी बढ़ा दिख रहा है। देहात के हरेक गांव से दो-चार श्रद्धालु बागड़ यात्रा पर जा रहे हैं। हरिद्वार और इसकी सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर व मुजफ्फरनगर जिले के हजारों, लाखों लोग बागड़ यात्रा में आस्था रखते हैं। नौकरी लगने, व्यापार की सफलता, पुत्र प्राप्ति, असाध्य बीमारियां ठीक करने के साथ ही लोग दूसरी दिक्कतों में भी बागड़ की जात चढ़ाने का संकल्प लेते हैं। उनकी मन्नत पूरी होने पर उन्हें परंपरा के मुताबिक बागड़ की जात ले जानी होती है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गुरु गोरखनाथ की गद्दी व जाहरवीर गोगा पीर की माहड़ी स्थित है। मन्नत पूरी होने पर लोगों को वहीं जाकर जात चढ़ानी पड़ती है। जात चढ़ाकर लौटने पर गांव के अपने परिचितों, रिश्तेदारों को कढ़ी चावल की दावत दी जाती है। इसे कंदूरी कहा जाता है।

