प्रभु श्रीराम के जीवन से सत्य और प्रेम की सीख मिलती है, श्री रामलीला कमेटी बहादराबाद के अध्यक्ष अनिल चौहान ने कहा युवा पीढ़ी रामलीला मंचन से लें सीख

बहादराबाद । श्री रामलीला कमेटी बहादराबाद के अध्यक्ष अनिल चौहान ने कहा है कि रामलीला मंचन से युवा पीढ़ी सीख ले कर अपने जीवन में प्रभु श्रीराम के चरित्र को अपनाएं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम श्री हरि विष्णु के दस अवतारो में से सातवें अवतार थे। बारह कलाओं के स्वामी श्रीराम का जन्म लोक कल्याण और इंसानो के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करने के लिए हुआ था। श्रीराम को हिन्दू धर्म के महानतम देवताओं की श्रेणी में गिना जाता है। वे करुणा, त्याग और समर्पण की मूर्ति माने जाते है। उन्होंने विनम्रता, मर्यादा, धैर्य और पराक्रम का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण संसार के सामने प्रस्तुत किया है। जो कण-कण में बसे, वही राम है। श्रीराम की सनातन धर्म में अनेकों गाथाएं विद्यमान है। श्रीराम के जीवन की अनुपम कथाएं, महर्षि वाल्मिकी ने बड़े ही सुंदर ढंग से रामायण में प्रस्तुत किया है।

इसके अतिरिक्त गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस रच कर जन-जन के हृदय तक श्रीराम को पहुंचा दिया।श्रीराम की शिक्षा-दीक्षा गुरु वशिष्ठ के आश्रम में सम्पन्न हुई थी। प्रभु राम बचपन से ही बहुत पराक्रमी थे। बाल्यकाल से ही अपने पराक्रम का अनुक्रम शुरु कर दिया था। आगे चलकर उन्होंने अनेकों राक्षसों का वध किया और सबसे महत्वपूर्ण महा बलशाली लंकापति रावण को मारा और इस धरती को पावन किया।
श्री रामलीला कमेटी बहादराबाद के अध्यक्ष अनिल चौहान ने बताया कि रामलीला मंचन का उद्देश्य यह है कि युवा पीढ़ी एवं सभी लोगों को प्रभु श्री राम के चरित्र से कुछ सीख मिले। भगवान श्रीराम ने जिस चरित्र का पालन किया, जिस मर्यादा का पालन किया, उनके चरित्र का, उनके द्वारा बनाई हुई मर्यादा का पालन इस मनुष्य को निरंतर करते रहना चाहिए। भगवान राम का जीवन अनुकरणीय है।

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