उत्तराखंड: केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की पहाड़ियों पर सीजन का पहला हिमपात, बढ़ने लगी ठंड

देहरादून । उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सोमवार देर रात मौसम का मिजाज बदला नजर आया। जिसके बाद तड़के केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की पहाड़ियों पर सीजन का पहला हिमपात हुआ। चोराबाड़ी ताल, दुग्ध गंगा व भैरव नाथ मंदिर की ऊपरी पहाड़ियों पर जमकर हिमपात हुआ है। वहीं, हाल ही में हुई बारिश और अब हिमपात से धामों में ठंड भी बढ़ने लगी है। सुबह करीब सात बजे के बाद यहां मौसम में सुधार हुआ और धूप खिली, जिससे यात्रियों को ठंड से राहत मिली। केदारनाथ में मंदिर समिति के कार्याधिकारी रमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि हिमपात के बाद से सुबह और शाम को ठंड बढ़ गई है। इधर, जिला मुख्यालय में सुबह से मौसम ठीक रहा लेकिन पूर्वाह्न 11 बजे के बाद आसमान में बादल छाने लगे और दोपहर साढ़े 12 बजे से सवा एक बजे तक झमाझम बारिश हुई। उधर, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ और गुप्तकाशी क्षेत्र में भी बारिश हुई। वहीं, यमुनोत्री धाम के ऊपर सप्त ऋषि कुंड, कालिंदी पर्वत, बंदरपूंछ, गरुड़ गंगा टॉप में तड़के हिमपात हुआ। हल्की बर्फबारी के बाद धाम में भी मौसम सुहावना हो गया है। उधर, पहाड़ों की रानी मसूरी, धनोल्टी और कैंपटी में सोमवार देर रात से हल्की बारिश हो रही है। बारिश के बाद मसूरी में भी हल्का कोहरा छाया हुआ है। साथ ही ठंड भी बढ़ने लगी है। वहीं, आज मैदानी इलाकों में दिन की शुरुआत चटख धूप के साथ हुई। गढ़वाल और कुमाऊं के कई इलाकों में हालांकि हल्के बादल छाए हैं, लेकिन ज्यादातर क्षेत्रों में धूप खिलने से उमसभरी गर्मी हो गई है। वहीं, बारिश के बाद भी बाबा केदार के भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा है। केदारनाथ में दर्शनार्थियों की संख्या 12 लाख से ज्यादा पहुंह गई है। बीते दस दिनों से धाम में प्रतिदिन श्रद्घालुओं की संख्या बढ़ रही है। इस वर्ष अब यात्रा के सिर्फ 37 दिन रह गए हैं। जिस तरह से यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, उससे उम्मीद है कि कपाट बंद होने तक यात्रियों की संख्या 15 लाख तक पहुंच सकती है। भक्तों की उमड़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर भी 14 से 15 घंटे खुल रहा है। यात्रियों की भीड़ के चलते मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। अब भक्तों को सभामंडप से ही दर्शन कराए जा रहे हैं। अब सुबह पांच बजे से दर्शन शुरू हो रहे हैं जो अपराह्न तीन बजे तक कराए जा रहे हैं। इसके बाद आराध्य को भोग लगाया जा रहा है, जिसके चलते एक से डेढ़ घंटे के लिए मंदिर को बंद किया जा रहा है। साढ़े चार बजे से पुन: मंदिर में दर्शन शुरू हो रहे हैं जो रात नौ बजे तक कराए जा रहे हैं।

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