उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में नींव का पत्थर हैं महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष: प्रो बत्रा

हरिद्वार । आज एस. एम. जे. एन. पी. जी. कॉलेज में महानायक इंद्रमणि बडोनी के 100वीं जयन्ती पर कॉलेज परिवार द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो सुनील कुमार बत्रा सहित प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा अनेको छात्र छात्राओं ने उत्तराखंड के गाँधी जननायक इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर प्रो सुनील कुमार बत्रा ने बडोनी के संघर्षों और योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि महानायक इंद्रमणि बडोनी का संघर्ष ही उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में नींव का पत्थर बना हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले उत्तराखंड के वीर सपूत इंद्रमणि बडोनी का विचार था कि आदमी की पहचान उसकी अपनी संस्कृति और परंपरा से ही होती हैं। प्रो बत्रा ने बताया कि जब जननायक इन्द्रमणि बडोनी ने उत्तराखंड राज्य आन्दोलन का बिगुल फूँका तब उत्तराखंड की सम्पूर्ण जनता अपने महानायक के पीछे लामबन्द हो गयी थी। उस वक्त बीबीसी ने कहा था कि यदि आपने जीवित एवं चलते फिरते गांधी को देखना है तो आप उत्तराखंड की धरती पर चले जायें, वहाँ गांधी आज भी अपनी उसी अहिंसक अन्दाज में विराट जन आंदोलनों का नेतृत्व कर रहा है।

बडोनी जी के विचारों का सार यही है कि “उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक विशिष्ट संस्कृति और कठिन भूगोल का जीवंत स्वरूप है, जिसका विकास इसकी अपनी शर्तों और अपनी पहचान के साथ होना चाहिए। प्राचार्य ने कहा कि “उत्तराखण्ड आंदोलन के सूत्रधार इन्द्रमणि बडोनी की आंदोलन में उनकी भूमिका वैसी ही थी जैसी आजादी के संघर्ष के दौरान ‘भारत छाड़ो’ आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीवादी ने निभायी थी इसी कारण अमरीकी अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने स्व.इन्द्रमणि बडोनी जी को ‘पहाड के गॉधी’ की उपाधि दी थी। उनहोने कहा कि जननायक इन्द्रमणि बडोनी का सपना पहाड को आत्मनिर्भर राज्य बनाने का था और उन्ही के प्रयासों से इस क्षेत्र में दुर्लभ औषधियुक्त जडी बूटियों की बागवानी प्रारम्भ हुई। उन्होंने कहा कि इंद्रमणि बडोनी का स्पष्ट मत था कि उत्तराखंड राज्य की आत्मा पहाड़ो में बसती हैं इसलिए राजधानी भी पहाड़ के केंद्र (गैरसैंण) में होनी चाहिए। इस कार्यक्रम में डॉ मनमोहन गुप्ता, प्रो जे सी आर्य, प्रो विनय थपलियाल, डॉ सुषमा नयाल, डॉ शिव कुमार चौहान, डॉ मोना शर्मा, डॉ लता शर्मा, डॉ विजय शर्मा, वैभव बत्रा, दिव्यांश शर्मा, डॉ हरीश चंद्र जोशी, डॉ मीनाक्षी शर्मा, कार्यालय अधीक्षक मोहन चंद्र पाण्डेय, विवेक चंद्र उनियाल सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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