राम शंकर सिंह की पुस्तक “सुभाषित सतसई” (दोहा संग्रह) का लोकार्पण
रुड़की। कवि राम शंकर सिंह की पुस्तक “सुभाषित सतसई” (दोहा संग्रह) का भव्य लोकार्पण लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल रुड़की के सभागार में, संस्कार भारती उत्तराखंड साहित्य विभाग एवं महानगर रुड़की इकाई के सौजन्य से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व निदेशक संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड एवं वर्तमान में संस्कृत भारती के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ आनन्द भारद्वाज और विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण सुकुमार, हरिप्रकाश शर्मा खामोश, डा अनिल शर्मा, किसलय क्रान्तिकारी और मनीष श्रीवास्तव रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्कार भारती उत्तराखंड साहित्य विभाग के प्रांत संयोजक डॉ राजकुमार उपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों में पंकज गर्ग, डॉ घनश्याम बादल, डाॅ विनय प्रताप सिंह, सौसिंह सैनी, दिनेश कुमार वर्मा, पंकज त्यागी असीम, अनिल अमरोहवी तथा संस्कार भारती से विवेक काम्बोज, विनय सैनी, नरेंद्र आहूजा, समय सिंह सैनी, सुशील रावत, मनीषा सिंघल, नीलम रहेजा, अनुपमा गुप्ता, श्रद्धा शर्मा, सतीश शर्मा, अविनाश सिंह, राजेश्वर प्रसाद, माधव, तनिष्क, अर्णव, आदित्य और प्रिंस सैनी आदि उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन एवं लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल की छात्रा नंदिनी अवस्थी के द्वारा सरस्वती वंदना के उपरांत अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया, तत्पश्चात पुस्तक का लोकार्पण हुआ। संस्कार भारती उत्तराखंड के कोषाध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव के द्वारा कवि राम शंकर सिंह का परिचय तथा उसके बाद वरिष्ठ साहित्यकार डाँ अनिल शर्मा के द्वारा पुस्तक परिचय प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर डाॅ राज कुमार उपाध्याय ने कहा- राम शंकर सिंह के द्वारा रचित सतसई परंपरा की यह पुस्तक छन्दबद्ध साहित्य जगत में अपना ऊँचा स्थान बनाएगी, इनकी रचनाएं साहित्यिकता की परम ऊँचाइयों को छूती हुई समाज का दिग्दर्शन करती हैं। डाँ आनन्द भारद्वाज ने कहा राम शंकर सिंह एक प्रबुद्ध शिक्षाविद हैं, इन्हें राज्य एवं राष्ट्र स्तर के अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, इनके विद्यार्थी जहाँ भी हैं, इन्हें बहुत याद करते हैं, इनकी इस पुस्तक में लिखे हुए सटीक दोहे निश्चित रूप से हम लोग अपने वक्तव्यों में उद्धृत करेंगे। किसलय क्रांतिकारी ने कहा- राम शंकर सिंह की लेखनी से कोई भी सामयिक और उपयोगी विषय अनछुआ नहीं है, आगे आने वाली पुस्तकों के विषय में भी जिज्ञासा प्रकट किये। अन्य गणमान्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बाद में कवि राम शंकर सिंह ने उपस्थित विद्वत्जनों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
इस पुस्तक में कवि राम शंकर सिंह के द्वारा लिखे गए 700 सुभाषित दोहे हैं, जो जीवन के सूत्र स्वरूप रचे गए हैं। यह हिंदी काव्य साहित्य में सतसई परंपरा की अनूठी छन्दबद्ध कृति है।
राजकीय इंटर कॉलेज रुड़की हरिद्वार से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राम शंकर सिंह की इस पुस्तक के पूर्व भी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें से “वही प्रिय गीत हैं मेरे” , “मगर कुछ भूल रहे हैं” , “नमन करूँ” और “संपूर्ण क्षत्रिय वंशावलियाँ” आदि प्रमुख हैं। अनेक साझा संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं, कुछ अन्य पुस्तकें भी प्रकाशनाधीन हैं। इन्हें “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार उत्तराखंड” , “उत्कृष्ट प्रधानाचार्य अलंकरण” और “गवर्नर टीचर्स अवार्ड उत्तराखंड” के साथ शैक्षिक, साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्र के 100 से अधिक पुरस्कार/ सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।


