धर्मनगरी में श्रद्धा के साथ मनाई अहोई अष्टमी, महिलाओं ने निर्जल व्रत रख कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
हरिद्वार । धर्मनगरी में अहोई अष्टमी का पर्व सोमवार को परंपरागत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। करवाचौथ के बाद अहोई अष्टमी ऐसा पर्व है, जब महिलाएं निर्जल व्रत रख कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। महिलाओं ने इसी अनुरूप उपवास रखा, तथा अहोई अष्टमी की कहानी सुन-सुना कर व्रत की परंपरा निभाई। सायं को महिलाओं ने तारे निकलने के बाद जल अर्पित कर उपवास खोला।महिलाओं ने अहोई माता की परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की आरती उतारी। उन्होंने अहोई माता से अपनी संतान की दीर्घायु उन्नति की कामना की। उपवास करने वाली महिलाओं ने घर की दीवार पर अहोई का चित्र बनाया, साथ में आठ कोष्ठक वाली एक पुतली बनाई। पुतली के पास ही स्याउ माता व उनके बच्चों की तस्वीर बना कर व जमीन पर चौका बना कर पीले रंग से रंगे हुए कलश की स्थापना करने के बाद पूजा-अर्चना की। बहादराबाद स्थित पथरी कालोनी में महिलाओं ने होई माता की पूजा अर्चना कर, अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। महिलाएं रात के समय तारों के दर्शन कर, अरग देकर अपना व्रत खोलेंगी हैं। दोपहर को सूर्यदेव को जल अपर्ण कर महिलाओं ने माता अहोई की कथा सुनी। इस मौके पर समाजसेविका संगीता प्रजापति, सरिता, सावित्री, मुन्नी, संजी, लक्ष्मी, बबीता, संतोष आदि मौजूद रही।

