कुँजा बहादुरपुर विद्रोह (1822/1824)भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी चिंगारी, राजा विजय सिंह और सेनापति कल्याण सिंह के नेतृत्व में विद्रोहियों ने कुंजा के किले से अंग्रेज़ी सेना का सामना किया
भगवानपुर । राजा विजय सिंह और सेनापति कल्याण सिंह के नेतृत्व में विद्रोहियों ने कुंजा के किले से अंग्रेज़ी सेना का सामना किया। 37 जुल्मी अंग्रेज मार गिराए गए। भीषण संघर्ष के बाद अंग्रेज़ों ने गाँव घेरकर दमन किया।152 से अधिक गुर्जर वीरों को बरगद के पेड़ पर सामूहिक फाँसी दी गई। यह विद्रोह केवल कर या शासन के खिलाफ नहीं था, यह गुर्जर समाज की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का संग्राम था।
इन बलिदानों ने पूरे उत्तरी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भूमि तैयार की। यह साबित करता है कि 1857 से बहुत पहले गुर्जर समाज ने आज़ादी की ज्वाला प्रज्वलित कर दी थी। स्थानीय बलिदान जिसने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया। हर वर्ष 3 अक्टूबर को यहाँ गुर्जर शौर्य स्मृति दिवस मनाया जाता है। शहीद राजा विजय सिंह स्मारक, कुंजा बहादुरपुर। यहां बरगद का पेड़ आज भी गुर्जर वीरता और बलिदान का प्रतीक है। कुंजा बहादुरपुर का यह विद्रोह बताता है कि गुर्जर समाज केवल खेती और पशुपालन का समुदाय नहीं था, बल्कि स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए प्राण देने वाला वीर समाज था।

