जेल से चल रहा था नशे का आनलाइन धंधा, रोडवेज परिचालक से चरस-गांजा सप्लाई कराते थे कैदी, स्पेशल टास्क फोर्स ने किया आनलाइन धंधे का भंडाफोड़
देहरादून । अल्मोड़ा जेल से चल रहे नशे के आनलाइन धंधे का भंडाफोड़ होने के बाद इस मामले में एक के बाद एक राजफाश हो रहे हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को तहकीकात में पता चला है कि इस धंधे में उत्तराखंड परिवहन निगम का परिचालक भी शामिल था। संविदा पर तैनात यह परिचालक अल्मोड़ा जेल में बंद कुख्यात महिपाल और अंकित के इशारे पर चरस-गांजा आदि नशे की खेप पहुंचाता था। बागेश्वर से मुख्य सप्लायर से भी चरस-गांजा यही परिचालक लाता था। एसटीएफ ने अल्मोड़ा जेल से नशे का धंधा संचालित किए जाने की सूचना पर मंगलवार को वहां छापेमारी की थी। इस दौरान जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे महिपाल उर्फ बड़ा और चरस तस्करी में पकड़े गए अंकित बिष्ट उर्फ अंगी दा के पास से मोबाइल, सिम व नकदी बरामद की गई थी। ये दोनों मोबाइल से आनलाइन नशे का धंधा कर रहे थे। इसके बाद एसटीएफ ने देहरादून, पौड़ी और चमोली जिले से इस गिरोह के गुर्गों दीपक तिवारी, संतोष रावत, भास्कर नेगी, मनीष बिष्ट व एक महिला संतोष को गिरफ्तार किया। इनके पास से करीब दो किलो चरस और 10 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद हुई थी। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि इस गिरोह में तीन गुर्गे और शामिल थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने बताया कि उनका मुख्य चरस सप्लायर भूपेंद्र उर्फ भुप्पी निवासी ग्राम चौड़ा कपकोट बागेश्वर है। भूपेंद्र से महिपाल और अंकित फोन पर बात कर नशे का आर्डर देते थे। भूपेंद्र से नशा उत्तराखंड परिवहन निगम का परिचालक अजय गुप्ता लेता था और उसे गिरोह के बाकी गुर्गों तक पहुंचाता था। वहां से नशा मांग के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था। अब एसटीएफ अजय, भूपेंद्र और ऋषिकेश की एक महिला की तलाश में जुटी है। उनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न जिलों में दबिश दी जा रही है।

