चुनावी सीजन में कंबल वितरित करने वाले समाजसेवी गायब, नगर निगम के चुनाव से पहले 2 साल तक कंबल स्वेटर जर्सी वितरित करते रहे दावेदार
रुड़की । नगर निगम का चुनाव हो गया है तो बहुत सारे नेताओं की समाज सेवा भी खूंटी पर टंग गई है। जो चुनाव के मद्देनजर पिछले 2 साल से स्वेटर, जर्सी, कंबल वितरित कर रहे थे । इस बार वह न जाने कहां गायब हो गए। जिस कारण खुले आसमान के नीचे जीवन व्यतीत करने वाले लोग ठिठुर रहे हैं । बच्चे बिना जर्सी और स्वेटर के नंगे पांव घूम रहे हैं। पहले की तरह इन्हें चाय पिलाने के लिए कोई नहीं आ रहा है। हालांकि जो हमेशा से ही गरीबों की हमदर्दी करते रहे हैं वह इस बार भी जितना हो सकता है उतना कर रहे हैं। लेकिन जो चुनाव के मद्देनजर कंबल ,जर्सी स्वेटर वितरित कर रहे थे। शाम और सुबह को सड़क पर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों को चाय पिला रहे थे । खिचड़ी खिला रहे थे । अब तीन-चार दिन से कड़क ठंड पड़ रही है। कोहरा बरस रहा है । रात से तो बारिश का रुक रुक कर सिलसिला जारी है ओलावृष्टि होने के बाद तो ठिठुरन और भी बढ़ गई है।। बंद कमरे में भी कपकपी छूट रही है। अब सोचिए कि जो लोग खुले आसमान के नीचे सड़क पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं उनकी इस ठंड में क्या दशा होगी। लेकिन एक रहे वह समाजसेवी जिनका दिल अभी तक पसीजा नहीं। यह वह समाजसेवी है जो कि रुड़की नगर निगम के चुनाव के मद्देनजर पिछले 2 साल से सर्दियों में कंबल और अन्य ऊनी वस्त्र वितरित कर रहे थे । भले ही थोड़े ही सही। लेकिन वस्त्र वितरित करते फोटो व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टाग्राम ट्विटर पर सेंड कर रहे थे। यहां तक कि सोशल मीडिया के अलावा वह प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया में भी अपना यह समाज सेवी रूप प्रदर्शित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे लेकिन इस बार चुनाव हो गए हैं। अब मेयर के दावेदार कहीं नजर आ रहे हैं और न ही पार्षद पद के दावेदारों को अपने वार्डों में सड़क पर खुले में रह रहे लोगों पर भी दया नहीं आ रही है। इसे साफ हो जाता है कि जो पिछले 2 साल से समाज सेवा नजर आ रही थी तो वह समाज सेवा न होकर इनके द्वारा अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए यह सब किया जा रहा था। एक पार्षद पति का तो मीडिया को यहां तक कह दिया कि बहुत काम कर लिया। अब तो चुनाव 5 साल बाद होंगे । इसीलिए अब आराम से रहने दिया जाए। चौंकाने वाली बात यह है कि जो कुछ सामाजिक संगठन थे वह भी कड़क ठंड में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। लगता है कि उनके पदाधिकारियों को भी ठंड ने जकड़ रखा है।