भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने भारत और दक्षिण एशिया के लिए 10-किलोमीटर रेज़ोल्यूशन वाला जलवायु प्रक्षेपण डेटासेट विकसित किया

रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के शोधकर्ताओं ने भारतीय उपमहाद्वीप के लिए “इंड्रा-सीएमआईपी6” नामक एक उच्च-रेज़ोल्यूशन ओपन-एक्सेस जलवायु प्रक्षेपण डेटासेट जारी किया है, जो ऐतिहासिक तथा भविष्य की जलवायु परिस्थितियों के अंतर्गत लगभग 10 किलोमीटर स्थानिक रेज़ोल्यूशन पर दैनिक वर्षा और तापमान प्रक्षेपण प्रदान करता है। स्थानीय स्तर पर जलवायु अनुकूलन और जोखिम आकलन को समर्थन देने के उद्देश्य से विकसित यह डेटासेट वैश्विक जलवायु मॉडलों की एक प्रमुख सीमा को दूर करता है, क्योंकि उनकी कम रेज़ोल्यूशन भारत की जटिल भौगोलिक संरचना, मानसूनी परिवर्तनशीलता और क्षेत्रीय जलवायु चरम स्थितियों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित नहीं कर पाती।

भारत पहले ही बदलती जलवायु के प्रभावों का सामना कर रहा है, जिनमें बढ़ता तापमान, अनियमित मानसून, शहरी बाढ़, श्रमिकों और फसलों पर गर्मी का दबाव तथा जल संसाधनों पर बढ़ता बोझ शामिल है। तटबंधों को मजबूत करने, शहरी जल निकासी प्रणालियों की योजना बनाने या जलवायु-सहिष्णु फसलों के चयन जैसे अनुकूलन निर्णयों के लिए महाद्वीपीय औसत के बजाय जिला और नदी बेसिन स्तर के प्रक्षेपणों की आवश्यकता होती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के जलविज्ञान विभाग में विकसित और “साइंटिफिक डेटा” (नेचर पोर्टफोलियो) में प्रकाशित “इंड्रा-सीएमआईपी6” डेटासेट 14 सीएमआईपी6 वैश्विक जलवायु मॉडलों के आउटपुट को “डबल बायस-करेक्टेड कंस्ट्रक्टेड एनालॉग (डीबीसीसीए)” विधि का उपयोग करके डाउनस्केल करता है। यह सांख्यिकीय डाउनस्केलिंग पद्धति दैनिक मौसम परिवर्तनशीलता, क्षेत्रीय वर्षा पैटर्न और तापमान की चरम स्थितियों के प्रतिनिधित्व में सुधार करती है।

यह डेटासेट 0.1° × 0.1° रेज़ोल्यूशन पर दैनिक वर्षा तथा न्यूनतम और अधिकतम तापमान डेटा उपलब्ध कराता है। इसमें व्यक्तिगत मॉडल आउटपुट और मल्टी-मॉडल एंसेंबल दोनों शामिल हैं, जिससे शोधकर्ता और योजनाकार विभिन्न प्रक्षेपणों की तुलना कर सकते हैं और किसी एक मॉडल पथ पर निर्भर रहने के बजाय अनिश्चितताओं का आकलन कर सकते हैं।
तकनीकी सत्यापन से पता चलता है कि “इंड्रा-सीएमआईपी6” कच्चे वैश्विक जलवायु मॉडल आउटपुट में मौजूद प्रणालीगत त्रुटियों को काफी हद तक कम करता है तथा अत्यधिक वर्षा और अत्यधिक तापमान वाले दिनों के प्रतिनिधित्व में सुधार करता है। ये सुधार विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं जहां स्थानीय भूगोल, मानसूनी गतिशीलता और स्थलाकृति जोखिम को प्रभावित करती हैं — जो भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख विशेषताएं हैं।

इस डेटासेट में चार “शेयर्ड सोशल-इकोनॉमिक पाथवे (एसएसपी)” शामिल हैं, जो भविष्य की निश्चित भविष्यवाणियां नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से तैयार संभावित परिदृश्य हैं कि विभिन्न विकास और उत्सर्जन विकल्पों के अंतर्गत भविष्य की जलवायु कैसी हो सकती है। “एसएसपी1-2.6” कम-उत्सर्जन और सतत भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है, जहां मजबूत जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से तापमान वृद्धि सीमित रहती है। “एसएसपी2-4.5” मध्यम मार्ग वाले भविष्य को दर्शाता है, जिसमें वर्तमान विकास प्रवृत्तियां जारी रहती हैं और कुछ जलवायु कार्रवाई के बावजूद उल्लेखनीय ताप वृद्धि होती है। “एसएसपी3-7.0” उच्च-उत्सर्जन और अधिक चुनौतीपूर्ण भविष्य को दर्शाता है, जिसमें कमजोर सहयोग, धीमी जलवायु कार्रवाई और अनुकूलन में अधिक कठिनाइयां शामिल हैं। “एसएसपी5-8.5” अत्यधिक उच्च-उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन-आधारित भविष्य को दर्शाता है, जिसका उपयोग अक्सर सबसे गंभीर ताप वृद्धि परिदृश्य के अध्ययन के लिए किया जाता है, जिसमें हीटवेव, अत्यधिक वर्षा और अन्य जलवायु जोखिम काफी बढ़ सकते हैं। इन चारों परिदृश्यों को शामिल करने से शोधकर्ताओं और योजनाकारों को यह समझने में सहायता मिलती है कि मजबूत शमन उपायों और उच्च-उत्सर्जन भविष्य के बीच भारत के जलवायु जोखिम किस प्रकार बदल सकते हैं।

“इंड्रा-सीएमआईपी6” की एक प्रमुख विशेषता इसका ओपन-एक्सेस स्वरूप है। एंसेंबल डेटासेट “जेनोडो” पर उपलब्ध हैं, जबकि व्यक्तिगत मॉडलों के पूर्ण डाउनस्केल और बायस-करेक्टेड आउटपुट “गूगल ड्राइव” के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 2.4 टेराबाइट आकार वाला यह डेटासेट वर्तमान में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए उपलब्ध सबसे विस्तृत ओपन जलवायु डेटा संसाधनों में से एक है।

यह डेटासेट विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं, सरकारी विभागों, नदी बेसिन प्राधिकरणों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, शहरी योजनाकारों और कृषि संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों के लिए उपयोगी है। इसका उपयोग बेसिन-स्तरीय जलवैज्ञानिक मॉडलिंग, बाढ़ और सूखा जोखिम आकलन, जलवायु-सहिष्णु अवसंरचना योजना, कृषि प्रभाव अध्ययन तथा स्थानीय अनुकूलन रणनीतियों के विकास में किया जा सकता है। यह पहल भारत की जलवायु सहनशीलता, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सतत जल प्रबंधन तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत साक्ष्य-आधारित योजना संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

“भारत में जलवायु जोखिम अत्यंत स्थानीयकृत हैं, विशेषकर मानसून-प्रभावित और पर्वतीय क्षेत्रों में। ‘इंड्रा-सीएमआईपी6’ जैसे सूक्ष्म-स्तरीय जलवायु प्रक्षेपण वैश्विक जलवायु विज्ञान को योजनाकारों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी और क्रियान्वित करने योग्य जानकारी में बदलने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे डेटासेट की ओपन-एक्सेस उपलब्धता वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करती है और प्रभावी जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को समर्थन प्रदान करती है,” प्रोफेसर अंकित अग्रवाल, जलविज्ञान विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने कहा।

“जलवायु परिवर्तन हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और वैज्ञानिक संस्थानों की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे समाज के लिए विश्वसनीय और सुलभ ज्ञान संसाधन विकसित करें। ‘इंड्रा-सीएमआईपी6’ भारत और व्यापक क्षेत्र के लिए जलवायु सहनशीलता, सतत विकास और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन देने वाले उच्च-प्रभावी अनुसंधान को आगे बढ़ाने के प्रति भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है,” प्रोफेसर कमल किशोर पंत, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने कहा।

इंड्रा-सीएमआईपी6 के बारे में
“इंड्रा-सीएमआईपी6” का पूर्ण रूप है – “इंडियन सबकॉन्टिनेंट हाई रेज़ोल्यूशन डाउनस्केल्ड प्रिसिपिटेशन एंड एयर टेम्परेचर डेटा फ्रॉम सीएमआईपी6”। यह भारतीय उपमहाद्वीप के लिए दैनिक वर्षा तथा अधिकतम और न्यूनतम तापमान डेटा उपलब्ध कराता है, जिसे 14 सीएमआईपी6 वैश्विक जलवायु मॉडलों और उनके मल्टी-मॉडल एंसेंबल से तैयार किया गया है। इस अध्ययन के लेखक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के जलविज्ञान विभाग से जॉयजीत मंडल, दिव्या सरदाना, आकाश सिंह रघुवंशी और अंकित अग्रवाल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *